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सत्र समापन पर आई खेल सामग्री, इसमें भी कर गए खेल, उठ रहे गुणवत्ता पर सवाल

खेल सामग्री बिल ब्रांडेड सामान का, क्वालिटी लोकल से भी घटिया। रामगढ ब्लाॅक के 227 स्कूलों को इन किटों का वितरण किया

अलवरMar 27, 2025 / 08:16 pm

Ramkaran Katariya

अलवर. सरकारी विद्यालयों के नौनिहालों को स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से इन दिनों स्कूलों में बांटी जा रही खेल सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सवालिया निशान लग रहे हैं। इस सामान के बिल में जो सामान की रेट लगाई गई है वो ब्रांडेड सामान की रेटों से भी अधिक है, लेकिन हकीकत में समान की गुणवत्ता लोकल बाजार में मिलने वाले सामान से भी घटिया बताई जा रही है। ऐसे में सत्र के समापन पर आई यह खेल सामग्री किस प्रकार नौनिहालों को खिलाडी बना पाएगी। रामगढ ब्लाॅक के स्कूलों में बुधवार को ही 227 स्कूलों को इन किटों का वितरण किया गया है, जिसके बाद से संस्था प्रधानों में इन किटों को लेकर असंतोष पनप रहा है।शारीरिक शिक्षक संघ शिक्षा विभाग की इस पहल का विरोध जता रहे हैं और ज्ञापन देने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सत्र लगभग समाप्त हो चुका है और अब सरकार और विभाग की ओर से परीक्षा के समय खेल का सामान भेजा गया। जिसकी क्वालिटी भी अच्छी नहीं है और उपयोगी भी नहीं है। एक तरफ शिक्षा विभाग सभी योजनाओं का पैसा डीबीटी के माध्यम से लाभार्थी अथवा स्कूलों के खाते में डालता है, फिर खेल सामग्री का पैसा स्कूल खातों में न डालकर अनुपयोगी खेल सामग्री को स्कूलों पर थोप कर क्या हासिल करना चाहता है।बजट का निर्धारण
शिक्षा विभाग के जानकारों ने बताया कि विभाग की ओर से स्कूलों में खेल सामग्री खरीद के लिए बजट का निर्धारण किया हुआ है। जिसमें प्राथमिक विद्यालय में 5 हजार, उच्च प्राथमिक विद्यालय में 10 हजार और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में 25 हजार की राशि का प्रावधान है। स्कूलों को भेजी गई खेल सामग्री किट में जो सामग्री है। उनका मूल्य उसकी क्वालिटी के हिसाब से बहुत ज्यादा है, जो सामग्री बाजार में सस्ते दामों में उपलब्ध है। उसे ज्यादा रेट में दर्शा कर स्कूलों में भेजा गया है।मनमर्जी से भेजी खेलों की सामग्रीआरोप है कि अधिकतर सरकारी विद्यालयों में खेल मैदान का अभाव है, जिसके कारण प्रत्येक स्कूल में अलग-अलग खेलों को अपनी सहूलियत के हिसाब से वहां के खिलाडी खेलते हैं और उन्हीं खेलों के आधार पर वहां कार्यरत शारीरिक शिक्षक अथवा संस्था प्रधान कमेटी के जरिए जरूरत के हिसाब से खेल सामग्री की खरीदारी करते थे, लेकिन इस बार खेल सामग्री की खरीदारी स्कूलों से करने के बजाय खेल किटों को प्रदेश मुख्यालय से सीधे स्कूलों में भिजवाया गया है। इन किटों में ऐसी खेल सामग्री भी है, जो उन विद्यालयों के काम की नहीं है। जैसे सभी स्कूलों में बास्केटबाॅल रिंग को भेजा गया है, जबकि सभी विद्यालयों में बास्केटबाॅल का मैदान नहीं है। जिसके कारण उन स्कूलों में इस रिंग का कोई उपयोग नहीं है। शारीरिक शिक्षकों का मानना है कि पूर्व में शिक्षक उपयोग के अनुसार ही सामग्री की खरीदारी करते थे और शेष राशि वापस विभाग के पास चली जाती थी, जिससे राजस्व को नुकसान नहीं होता था, लेकिन इस बार इस खेल बजट के नाम पर पूरी राशि की खेल किटों का वितरण कर दिया, वो भी गुणवतायुक्त नहीं है, जिससे राजस्व को चूना लगा है। पूर्व में जहां खेल सामग्री को खरीदने का जिम्मा विद्यालय की कमेटी का था, वहीं इस बार ये सामग्री विद्यालयों में प्रदेश मुख्यालय से सीधे स्कूलों में भिजवाई गई है।गुणवत्तापूर्ण और स्कूलों की मांग के अनुरूप नहीं
स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से स्कूलों में भेजी गई खेल सामग्री की किट न तो गुणवत्तापूर्ण है और न ही स्कूलों की मांग के अनुरूप। विभाग को विद्यालयों की मांग के अनुसार उन्हें सीधे बजट का आवंटन करना था, जिससे वो अपने स्कूलों में आवश्यकता के अनुरूप सामग्री की खरीद कर सके। स्कूलों को भेजी गई खेल सामग्री किट के सम्बन्ध में शारीरिक शिक्षा संघ की ओर से विरोध किया जाएगा और इस सम्बन्ध में विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जाएगा।
मक्खनसिंह गुर्जर, जिलाध्यक्ष शारीरिक शिक्षक संघ।

……………हमारा कार्य केवल इन्हें वितरण करना

रामगढ ब्लाॅक में बुधवार को 227 खेल सामग्री किटों का वितरण किया गया है। जिनमें 88 किट प्राथमिक विद्यालयों को, 76 किट उच्च प्राथमिक तथा 63 किट उच्च माध्यमिक स्कूलों को वितरित की गई है। खेल सामग्री की क्वालिटी की कोई जानकारी नहीं है। विभाग की ओर से किटों को भेजा गया है। हमारा कार्य तो केवल इन्हें वितरण करने का है।
रमेश गांधी, सीबीईओ, रामगढ।

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