परिवार का ही पेशा चुना
कई वकील ऐसे हैं, जिनका परिवार वकालत के पेशे से जुड़ा है। ऐसे में कई युवाओं ने अपने परिवार के पुश्तैनी पेशे को ही अपना करियर चुना है। कई वकील ऐसे हैं जो दिल्ली, जयपुर में वकालत कर रहे हैं। कई सरकारी कर्मचारी भी सेवानिवृत होने के बाद वकालत कर रहे हैं।केस बढ़ रहे, इसलिए दिख रहा भविष्य
जिले में पेंडिंग केसेज की संया लगातार बढ़ रही है। उस हिसाब से वकीलों की संया कम है। यही वजह है कि युवाओं का रुझान बढ़ा है। कई बड़ी कंपनियों में लीगल ऑफिसर के पद होते हैं, उसमें भी रोजगार मिल रहा है। यह भी रुचि बढ़ने की एक वजह है।राजनीति में भी रुतबा
राजनीति में भी वकीलों का अलग ही रुतबा है। देश के उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी पेशे से वकील हैं। केंद्रीय वन मंत्री और अलवर सांसद भूपेंद्र यादव भी वकील हैं। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी वकालत पास हैं। पूर्व विधायक रामहेत यादव भी वकालत कर चुके हैं। भाजपा के पूर्व शहर अध्यक्ष केजी खंडेलवाल, पूर्व प्रदेश मंत्री सुरेश यादव और जिला उपाध्यक्ष सुभाष दायमा भी वकील हैं।यह भी पढ़ें:
RTE के इस नियम के फेर में उलझे अभिभावक, बच्चों का पोर्टल पर नहीं हो रहा पंजीयन