Navratri 2025: छिंदवाली महाकाली मंदिर का वर्षों पुराना इतिहास, यहां श्रद्धालुओं की हर मुराद होती है पूरी
Navratri 2025: जगदलपुर बस्तर धार्मिक, सांस्कृतिक और एतिहासिक विशषताओं को समेटे पूरे विश्व में विख्यात है। यहां की प्राचीन गाथाएं लोगों को आकर्षित करती है।
Navratri 2025: जिला मुख्यालय जगदलपुर के मोती तालाब पारा स्थित छिंदवाली महाकाली मंदिर भी अपनी मान्यताओं के चलते श्रद्धालुओं के आस्था का केन्द्र हैं। छिंदवाली महाकाली मंदिर में माता के दर्शन के लिए दूर दूर से मां काली के भक्त आते हैँ और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।
2/5
Navratri 2025: शहर दक्षिण में लगभग 26 साल पूर्व स्थापित महाकाली मंदिर को छिंदवाली महाकाली के रूप में पूजन किया जाता है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना के पूर्व यहां पर एक छिंद का पेड़ हुआ करता था। इस पेड़ के पास निवास करने वाले लोग बताते हैं कि छिंद पेड़ में सूर्य उदय के पहले घने केश बिखराएं माता निकल कर आसपास भ्रमण करती थी और लोगों के देखे जाने के बाद पेड़ पर लुप्त हो जाती थी।
3/5
Navratri 2025: लोगों ने श्रद्धावश एक चबूतरा बना कर छिंदपेड़ की पूजा करने लगे। मंदिर के पुजारी आचार्य हेमंत शर्मा ने बताया कि लोग अपनी परेशानियों की मुक्ति और मनोकामना के लिए पेड़ पर नारियल बांधने लगे और लोगों की मुराद पूरी होने लगी।
4/5
Navratri 2025: कुछ दिनों बाद एक ही रात कई लोगों को इस स्थान पर काली माता ने मंदिर बनाने का सपना दिया। इसके बाद इस मंदिर की स्थापना के लिए लोग आगे आए और 29 अप्रैल 1998 को अक्षय तृतीया के दिन मंदिर में मां काली की प्राण प्रतिष्ठा की गई।
5/5
Navratri 2025: मुख्य पुजारी हेमंत शर्मा और उत्त्म शर्मा ने बताया कि रियासत काल से इस स्थान पर मां काली की पूजा की जाती है। छिंदपेड़ में निवास करने के कारण इसे छिंदवाली महाकाली कहा जाता है। आज भी श्रद्धालु इस मंदिर में नारियल बांध कर अपने मनोकामना पूर्ति के लिए अर्जी लगाते हैं। समय के साथ साथ लोगों की मनोकामना पूरी होती है।