scriptजयपुर के अलावा इन जिलों में भी पुराने नंबर बेचने का खेल, एक्टिव मोड में विभाग; अब खंगालेगा 10 साल का रिकॉर्ड | Case of fake retention of VIP numbers of old vehicles in Rajasthan department will check 10 years old record | Patrika News
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जयपुर के अलावा इन जिलों में भी पुराने नंबर बेचने का खेल, एक्टिव मोड में विभाग; अब खंगालेगा 10 साल का रिकॉर्ड

Rajasthan News: पुराने वाहनों के वीआईपी नंबरों को फर्जी तरीके से रिटेंशन कराने के मामले में परिवहन विभाग अब सख्ती बरतने जा रहा है। विभाग हर सभी आरटीओ कार्यालयोें से रिपोर्ट मांग रहा है।

जयपुरApr 02, 2025 / 08:14 am

Anil Prajapat

Transport-Department
जयपुर। पुराने वाहनों के वीआईपी नंबरों को फर्जी तरीके से रिटेंशन कराने के मामले में परिवहन विभाग अब सख्ती बरतने जा रहा है। विभाग हर सभी आरटीओ कार्यालयोें से रिपोर्ट मांग रहा है। विभाग इसकी जांच करेगा कि पुराने नंबरों से जिन वाहनों में रिटेंशन किया गया है क्या वह सही है या नहीं।
जयपुर आरटीओ प्रथम से इस फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद विभाग एक्टिव मोड में आ गया है। इधर, विभाग ने भले ही दो कार्मिकों पर कार्रवाई कर दी। लेकिन इस प्रकरण में जयपुर आरटीओ के अन्य बाबूओं की भी भूमिका संदिग्ध सामने आ रही है।
कारण है कि आरटीओ प्रथम ने जिन 79 वाहनों के बैकलॉग में यह फर्जीवाड़ा पकड़ा है यह सिर्फ एक दिन में किए गए। जबकि आरटीओ में पिछले 10 सालों से फर्जीवाड़े का यह खेल चल रहा है। गैर परिवहन शाखा में कई बाबू इस सीट पर काम कर चुके। इस दौरान सैकड़ों पुराने वाहनों के नंबरों के रिटेंशनकिए गए। पूरी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है।

पुराना रिकॉर्ड गायब, पन्ने भी फाड़े

इसको देखते हुए आरटीओ की ओर से बीते 10 सालों में बैकलॉग वाहनों के रिकॉर्ड भी जांच कराई जा रही है। आरटीओ राजेन्द्र सिंह शेखावत का कहना है कि सन 1989 के पहले के सभी वाहनों के रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। देखा जा रहा है कि कहीं वाहनों का फर्जीवाड़ा और तो नहीं हुआ।
इधर, आरटीओ में पुराने रिकॉर्ड को गायब करने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरटीओ ने रिकॉर्ड गायब करना और पन्ने फाड़ देने के मामले को भी गंभीरता से लिया है। परिवहन आयुक्त शुचि त्यागी ने कहा कि पूरे प्रकरण में सभी आरटीओ कार्यालयों से रिपोर्ट ली जा रही है। मुख्यालय स्तर पर जांच करेंगे। जो भी दोषी है उन पर सख्ती से कार्रवाई होगी।
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डीटीओ की भूमिका संदिग्ध

पुराने वाहनों के नंबरों को रिटेंशन करने की प्रक्रिया डीटीओ की अनुमति के बिना नहीं हो सकती। जयपुर के अलावा झुंझुनूं, दौसा, सवाईमाधोपुर, जोधपुर और सलूंबर आरटीओ कार्यालयों में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। इन कार्यालयों के डीटीओ भी सवालों के घेरे में है। जयपुर में मामला खुलने के बाद अब आनन-फानन में फर्जीवाड़े को दबाने की कोशिश की जा रही है।

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