बीआरएस नेताओं द्वारा पिछले साल कांग्रेस में शामिल हुए बीआरएस विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस ए.जी. मसीह की पीठ ने मुख्यमंत्री को फटकार लगाते हुए कहा, ‘सदन में ऐसा कहा जाना मुख्यमंत्री द्वारा 10वीं अनुसूची का मजाक उड़ाना है।’
बुधवार को याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील सी. आर्यमन सुंदरम 26 मार्च को विधानसभा में दिए गए सीएम के बयान को अदालत के संज्ञान में लाए। प्रतिवादियों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि वर्तमान मामले में विधानसभा की कार्यवाही प्रश्नगत नहीं है। पीठ ने कहा कि विधानसभा में दिए गए बयानों की पवित्रता होती है। जस्टिस गवई ने रोहतगी से कहा कि वे मुख्यमंत्री को चेतावनी दें कि ऐसी गलती न दोहराएं। जाहिर तौर पर पीठ उस टिप्पणी का जिक्र कर रही थी जो दिल्ली शराब नीति मामले में बीआरएस एमएलसी के. कविता को दी गई जमानत को लेकर पिछले साल अगस्त में सीएम रेड्डी ने की थी। रेड्डी ने कथित तौर पर कहा था कि पांच महीने के भीतर कविता को जमानत हासिल हो सकती हैं क्योंकि बीआरएस का वोट बैंक भाजपा को हस्तांतरित हो गया है। तब सुप्रीम कोर्ट के सीएम रेड्डी को उनकी टिप्पणी के लिए दोषी ठहराने पर रेड्डी ने बिना शर्त खेद व्यक्त किया था।