पैतोंगटार्न शिनावात्रा के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता
मोदी ने बैंकॉक में अपने थाई समकक्ष पैतोंगटार्न शिनावात्रा के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की और दोनों नेताओं ने भारत-थाईलैंड संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया और विनाशकारी भूकंप के दौरान हुई जनहानि पर संवेदना भी व्यक्त की। बिम्सटेक ने पिछले एक दशक में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में क्षेत्रीय विकास, संपर्क और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के रणनीतिक महत्व पर भी जोर दिया।
हमने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाने का निर्णय लिया: मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “आज हमने अपने संबंधों को रणनीतिक स्तर की साझेदारी तक बढ़ाने का फैसला किया है। हम अपनी सुरक्षा एजेंसियों के बीच रणनीतिक संवाद स्थापित करने पर भी सहमत हुए हैं।” पीएम मोदी ने दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला और 18वीं सदी के रामायण भित्ति चित्रों पर आधारित एक विशेष डाक टिकट जारी करने के लिए थाई प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा का आभार व्यक्त किया।
सहयोग और मजबूत करने के लिए चर्चाओं में शामिल होने के लिए उत्सुक
उन्होंने कहा, “मैं बिम्सटेक देशों के नेताओं से मिलने और हमारे लोगों के हितों को सबसे आगे रखते हुए हमारे सहयोग को और मजबूत करने के लिए सार्थक चर्चाओं में शामिल होने के लिए उत्सुक हूं।” प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए थाईलैंड ( Thailand) के प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा ने रॉयल हाउस का दरवाजा खोला। इस मौके पर पीएम मोदी को थाई प्रधानमंत्री की ओर से “द वर्ल्ड टिपिटका: सज्जया ध्वन्यात्मक संस्करण” भेंट किया गया।
भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का एक प्रतिष्ठित संकलन
यह विशेष संस्करण 2016 में थाई सरकार की ओर से राजा भूमिबोल अदुल्यादेज (राम IX) और रानी सिरीकिट के 70 साल के शासनकाल के उपलक्ष्य में प्रकाशित किया गया था, और इसे विश्व टिपिटका (Tripitaka) परियोजना के हिस्से के रूप में तैयार किया गया। टिपिटका (पाली में) या त्रिपिटक (संस्कृत में) भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का एक प्रतिष्ठित संकलन है, जिसमें 108 खंड शामिल हैं और इसे प्रमुख बौद्ध धर्मग्रंथ माना जाता है।
मोदी की थाईलैंड यात्रा : अतीत के झरोखे
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछली बार सन 2019 में थाईलैंड पहुंचे थे, जब वे 14वें एशिया-पूर्व शिखर सम्मेलन और भारत-आसियान शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए बैंकॉक गए थे। इस यात्रा के दौरान उन्होंने थाईलैंड के प्रधानमंत्री प्रयुत चान-ओ-चा से मुलाकात की थी। इस यात्रा के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौते हुए थे, जिनमें भारत-आसियान साझेदारी को मजबूत करने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण दोनों देशों ने आसियान देशों के साथ भारत की साझेदारी को और मजबूत करने के लिए रणनीतिक उपायों पर सहमति जताई थी।
दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत किया गया
वहीं रक्षा और सुरक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए समझौते किए गए थे, जिनमें आतंकवाद, साइबर सुरक्षा, और समुद्री सुरक्षा पर सहयोग बढ़ाने की बात की गई थी। साथ ही व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच कई व्यापारिक समझौते हुए थे, जिससे दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत किया गया। तब दोनों देशों ने पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने विशेष रूप से भारतीय पर्यटकों को थाईलैंड आकर्षित करने के लिए समझौते किए थे।