मध्य प्रदेश की राजधानी
भोपाल के जेपी अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा मिश्रा के अनुसार, छोटी और आकर्षक रील्स लगातार स्क्रीन या ध्यान बनाए रखने के लिए डिजाइन की गई होती हैं। पलक झपकने की दर 50 फीसदी तक कम हो जाती है, जिससे आंखें सूख जाती हैं और आई स्ट्रेन बढ़ता है।
यह भी पढ़ें- एमपी में साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव, 3 दिन गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट, कई क्षेत्रों में गिरे ओले बच्चों को सिखाएं नए गुण
-स्वीमिंग गर्मियों में बच्चों को तैरने का गुण सिखाया जा सकता है। यह लाइफ सेविंग स्किल है और साथ में पूरे शरीर की एक्सरसाइज भी है। जो बच्चे करना पसंद भी करते हैं।
-न्यूज पेपर बच्चों को पढ़ने के लिए न्यूज पेपर दें। जिससे उनकी भाषा पर पकड़ मजबूत होगी। इसके बाद उनके रुझान के अनुरूप किताबें भी दी जा सकती हैं।
यह भी पढ़ें- एमपी में एक साथ 4 सड़क परियोजनाएं मंजूर, 4 लेन बनेंगी सड़कें, सीएम मोहन ने जताया केंद्र का आभार
50 फीसदी आबादी पर मायोपिया का खतरा
एक अनुमान के मुताबिक, 2050 तक दुनिया की 50 फीसदी आबादी मायोपिया से पीड़ित हो सकती है। पहले 21 साल की उम्र के चश्मे का नंबर नहीं बढ़ता था, लेकिन अब 30 साल की उम्र में भी चश्में का नंबर बढ़ जा रहा है।
20-20-20 का फार्मूला अपनाएं
इस समस्या से बचने के लिए राजधानी भोपाल में स्थित जय प्रकाश अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा मिश्रा का कहना है कि, स्क्रीन की समस्या से बचने के लिए 20-20-20 का फार्मूला अपनाएं। हर 20 मिनट में 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर से फोन देखें।