scriptबचाओ-बचाओ की चीखें और फिर सन्नाटा…बेबस मां की आंखों के सामने जिंदा जल गए 2 मासूम, गांव में मातम | Screams of "save me, save me" and then silence… the innocent children were burnt alive in front of the eyes of the helpless mother, who was drowned in grief | Patrika News
बदायूं

बचाओ-बचाओ की चीखें और फिर सन्नाटा…बेबस मां की आंखों के सामने जिंदा जल गए 2 मासूम, गांव में मातम

अपनी जान बचाने के लिए मासूम सुमित और दीपक घर भागने की जहग चारपाई के नीचे छिपकर रजाई ओढ़कर बैठ गए, लेकिन आग इतनी भयावह थी कि दोनों मासूम कहां बच पाते वहां तो हरे भरे पेड़ों से भी आग की लपटें उठ रहीं थी।

बदायूंApr 04, 2025 / 09:25 am

Aman Pandey

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बदायूं का जिंसी नगला गांव। सूरज ढल रहा था। गांव की गलियां बच्चों की हंसी-ठिठोली से गूंज रही थीं। घरों में चूल्हे जल चुके थे…सब कुछ समान्य था। लेकिन फिर… बचाओ-बचाओ की एक तेज चीख ने पूरे गांव की शांति को चीर दिया। कुछ ही सेकंड में पूरा गांव सन्नाटे से चीख-पुकार में बदल गया। जब तक लोग कुछ समझ पाते आग की लपटें आसमान छूने लगीं थी। चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। घरों के साथ-साथ हरे भरे पेड़ भी जल रहे थे लेकिन सामने आग की लपटों से मौत का मंजर बेबसी में हर कोई देखता रहा।

5 दिन पहले नानी के घर आया था मासूम

कादरचौक के जिंसी नगला गांव में अचानक गैस सिलेंडर में आग लगने से पूरा छप्परनुमा घर धू-धूकर जल उठा। लपटें उठती देख गांव में अफरा-तफरी मच गई। अपनी जान बचाने के लिए मासूम सुमित और दीपक घर भागने की जहग चारपाई के नीचे छिपकर रजाई ओढ़कर बैठ गए, लेकिन आग इतनी भयावह थी कि दोनों जिंदा जल गए। परिवार के लोगों ने बताया कि दीपक पांच दिन पहले ही अपनी नानी के घर आया था और अग्निकांड ने वापस नहीं जाने दिया।

मासूमों की चीखें धुएं में घुटकर गुम हो गईं

सिलेंडर फटने के बाद धमाका हुआ और फिर तेज लपटों से आग लगी, धुएं के गुबार में आंखें चौंधिया गईं, सांसें रुकने लगीं। जो जहां था वहीं से आग बुझाने के लिए दौड़ा। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। जिन मासूमों की खिलखिलाहट से गलियां गूंजती थीं, उनकी चीखें धुएं में घुटकर कहीं गुम हो गईं। जहां कभी मासूमों की किलकारियां गूंजती थीं वहां अब करुण क्रंदन है।
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लेट पहुंची फायर ब्रिगेड

गांव के लोगों का कहना है आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड को फोन किया, लेकिन दूरी ज्यादा होने के कारण समय पर नहीं पहुंची। फायर ब्रिगेड करीब डेढ़ घंटे बाद आई, तब तक लपटें भयानक रूप ले चुकी थीं। लोग बेबस होकर देखते रहे, बच्चों की चीखें धुएं में खो गईं। अगर दमकल समय पर पहुंच जाती, तो शायद तबाही इतनी भयावह न होती।

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