रिक्त चेक लेकर राशि निकाल ली
नगर पालिका अध्यक्ष को की गई शिकायत में चौरई निवासी उमेश ठाकुर पिता स्व. श्याम ठाकुर ने बताया कि छह माह पूर्व उनकी मां ममता ठाकुर का देहांत हो गया था। उन्होंने नगर पालिका चौरई में संपर्क कर संबल योजना में पंजीयन की जानकारी मांगी। इस पर संबंधित शाखा के कर्मचारी अंशुल चौरसिया ने बताया कि मृतक का संबल योजना में पंजीयन नहीं है। एक सप्ताह बाद अंशुल ने उमेश से संपर्क कर बताया कि भोपाल स्तर पर सेटिंग हो गई है और वह उच्च अधिकारियों से बात कर लेंगे, जिससे संबल योजना के तहत राशि मिल जाएगी। लेकिन इसके लिए कमीशन देना होगा। गारंटी के तौर पर हस्ताक्षर किया हुआ एक रिक्त चेक भी देना पड़ेगा। उमेश से चेक लेकर अंशुल ने प्रक्रिया शुरू की।
कुछ दिनों बाद उमेश ठाकुर के खाते में चार लाख रुपये जमा हुए, लेकिन इसमें से तीन लाख रुपये अंशुल चौरसिया ने चेक के माध्यम से निकाल लिए। कम राशि मिलने पर उमेश ने इस पूरे मामले की शिकायत की। शिकायत मिलने पर नगर पालिका अध्यक्ष ने सीएमओ को पत्र लिखकर मामले की सूक्ष्म जांच करने और पूर्व के संबल योजना से जुड़े मामलों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
राजस्व वसूली में भी घोटाले की आशंका
जानकारी के अनुसार, अंशुल चौरसिया द्वारा ही राजस्व वसूली को ऑनलाइन पोर्टल में दर्ज किया जाता है। ऐसे में वहां भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। अब प्रशासन ने न केवल संबल योजना बल्कि अन्य योजनाओं और राजस्व वसूली में भी गड़बड़ी की जांच करने का फैसला किया है।
सीएमओ नपा चौरई, अभयराज सिंह ने कहा कि ‘मामला गंभीर है। मैंने एसडीएम से मिलकर जांच टीम बनाने का आग्रह किया है। संबल सहित अन्य योजनाओं और राजस्व वसूली की भी जांच कराई जाएगी।’ वहीँ, एसडीएम चौरई, प्रभात मिश्रा ने कहा कि ‘संबल योजना में गोलमाल की जानकारी मिली है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।’
फर्जी दस्तावेजों से गुमराह किया गया प्रशासन
मध्य प्रदेश सरकार की संबल योजना में पंजीयन होने पर साधारण मृत्यु पर दो लाख रुपये और दुर्घटना में मृत्यु होने पर चार लाख रुपये की सहायता राशि दिए जाने का प्रावधान है। इसके लिए मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफआईआर सहित अन्य दस्तावेज आवश्यक होते हैं।
इस मामले में प्राप्त जानकारी के अनुसार, ममता ठाकुर की मृत्यु कैंसर से हुई थी। लेकिन इसे दुर्घटना में मृत्यु बताकर चार लाख रुपये की राशि प्राप्त की गई। इससे साफ है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर प्रकरण में संलग्न किए गए और शासन को गुमराह किया गया।
अब यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस तरह के अन्य मामलों में भी इसी तरह का घोटाला किया गया होगा। प्रशासन द्वारा इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच की जा रही है, जिससे अन्य फर्जी मामलों का भी खुलासा हो सकता है