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CG News: गरियाबंद में खेलगढ़िया घोटाला! कलेक्टर की रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे, मचा हड़कंप

CG News: गरियाबंद जिले को अकेले खेलगढ़िया योजना में ढाई करोड़ का फंड मिला था। इन पैसों से बच्चों के लिए खिलौने खरीदे जाने थे। जिला पंचायत में मुद्दा उठा कि मैनपुर ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में इन पैसों से टीवी खरीदवा दिए गए।

गरियाबंदApr 05, 2025 / 05:07 pm

Love Sonkar

CG News: गरियाबंद में खेलगढ़िया घोटाला! कलेक्टर की रिपोर्ट में हुए चौंकाने वाले खुलासे, मचा हड़कंप
CG News: गरियाबंद जिले में खेलगढ़िया घोटाले पर कलेक्टर स्तर की जांच के बाद भी लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने नए सिरे से जांच बिठाई है। ये भी एक साल दबी रही। पत्रिका ने लगातार खबरें छापी, तो डीपीआई को पिछले महीने जांच से 2 अफसर हटाकर नए अधिकारी नियुक्त करने पड़े। अब जाकर घोटाले के मुख्य आरोपी तत्कालीन डीएमसी और वर्तमान में सहायक सांख्यिकी अधिकारी श्याम चंद्राकर की 8 अप्रैल को पहली पेशी होनी है। बता दें कि कलेक्टर की रिपोर्ट में पूरे जिले में घोटाले की संभावना जताई गई थी। इसके बावजूद डीपीआई की जांच अभी भी मैनपुर ब्लॉक तक सीमित है।

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गौरतलब है कि 2019-20 में गरियाबंद जिले को अकेले खेलगढ़िया योजना में ढाई करोड़ का फंड मिला था। इन पैसों से बच्चों के लिए खिलौने खरीदे जाने थे। जिला पंचायत में मुद्दा उठा कि मैनपुर ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में इन पैसों से टीवी खरीदवा दिए गए। तब भी घोटाला दबाने का इतना दबाव था कि 2 साल जांच ही नहीं हुई। 2023 में कलेक्टर ने टीम बनाकर जांच करवाई। रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन डीएमसी श्याम चंद्राकर ने संकुल समन्वयकों और प्राचार्यों पर मौखिक दबाव बनाकर उन्हें टीवी खरीदने के लिए मजबूर किया था।
ऐसे में उन्हें पूर्ण रूप से दोषी करार दिया गया। इसका प्रतिवेदन डीपीआई को भेजा गया, लेकिन नीचे के अफसरों ने प्रतिवेदन न मिलने की बात कहते हुए एक साल जांच रोके रखी। इस बार भी केस में नए अधिकारी नियुक्त हुए, तो हते-10 दिन तक उन्हें प्रतिवेदन नहीं मिला। पत्रिका में इसकी भी खबरें छपी, जिसके बाद कलेक्टर की पुरानी रिपोर्ट सामने आ गई है। 8 तारीख को चंद्राकर को जांच प्रस्तुतकर्ता अधिकारी महेश पटेल (मैनपुर बीईओ) के साथ रायपुर डाइट में जांच अधिकारी बीएल देवांगन के सामने पेश होना है। पेशी में चंद्राकर से पूछताछ होगी।
गजब: जांच का दायरा बढ़ाने शिकायत चाहिए

सरकारी पैसों में गफलत का मामला उजागर होने के बाद भी विभाग ज्यादा संजीदा नहीं है। विभाग का कहना है कि शिकायत मैनपुर ब्लॉक से हुई थी, तो जांच का दायरा भी वहीं तक सीमित है। बता दें कि चंद्राकर के इशारों पर जब मैनपुर में गड़बड़ी हुई, तब वे पूरे जिले के प्रभारी थे। अगर मैनपुर में अनियमितता हुई है, तो जिले के दूसरे ब्लॉक में भी भ्रष्टाचार की पूरी संभावना है। खेलगढ़िया के ढाई करोड़ के अलावा यूथ और ईको क्लब के फंड में भी गोलमाल पाया गया है। इसके बावजूद ब्लॉक के बजाय जिला स्तर पर जांच से जुड़ा सवाल पूछने पर अफसर कहते हैं, जिला स्तर पर अनियमितता की शिकायत करवा दीजिए। देख लेंगे। सवाल ये है कि ब्लॉक स्तर के ही घोटाले में 5 साल तक जांच-जांच खेलने वाले अफसरों से क्या ये उमीद की जा सकती है वे अपने और दोषियों के रिटायरमेंट से पहले जिला स्तर की जांच निपटा पाएंगे!
खेलगढ़िया, ईको और यूथ क्लब योजना जिस उद्देश्य से बनाई गईं, उस मुताबिक डीएमसी श्याम चंद्राकर का बयान तर्क संगत नहीं है।

टीवी खरीदने डीएमसी ने सक्षम अधिकारी से कोई लिखित अनुमति नहीं ली थी। भंडार क्रय नियम-2020 का भी उल्लंघलन किया है।
टीम को दिए डीएमसी के बयान से भी साफ है कि खेलगढ़िया, यूथ क्लब के पैसों से टीवी खरीदने के मौखिक निर्देश उसी ने दिए थे।

उपलब्ध दस्तावेजों और गवाहों के कथन अनुसार, राज्य सरकार के दिशा-निर्देश के विपरीत सामग्रियों की खरीदी करना प्रतीत होता है।
चंद्राकर ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर विधायिका/योजना विभाग की मंशा के खिलाफ मौखिक दिशा-निर्देश जारी किए।

केवल एक ब्लॉक में टीवी खरीदकर 17.88 ला से 22.35 लाख की क्षति हुई। पांचों ब्लॉक में भी गड़बड़ी की भरपूर संभावना है।
योजना का उद्देश्य हतोत्साहित होने से गरियाबंद जिले की छवि धूमिल हुई। इसके लिए श्याम चंद्राकर प्रथम दृष्टया पूर्णत: दोषी हैं।

हम बिलकुल निष्पक्ष तरीके से जांच करेंगे। खेलगढ़िया, ईको और यूथ क्लब के फंड में गड़बड़ी को लेकर 8 अप्रैल को श्याम चंद्राकर को रायपुर बुलाया है।
  • बीएल देवांगन, जांच अधिकारी (प्राचार्य डाइट)

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