यह रहे आकर्षण का केंद्र
परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ. अतुल गुप्ता ने कहा कि गोबर से बने जैविक खाद, गोमूत्र से बने प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य गो आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रहे। सम्मेलन का उद्देश्य किसानों को गो आधारित कृषि प्रणाली की महत्ता और लाभों के बारे में जागरूक करना है। विशेषज्ञों ने गो आधारित प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपनाने पर जोर दिया। कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि किसानों को नई तकनीक सीखने के साथ किसानी व गोधन को बचाते हुए उसके प्रोडक्ट्स को बनाने पर एक-दूसरे से नुस्खे साझा करें।

साझा की सफलता की कहानी, लाखों रुपए का पैकेज छोड़कर शुरू किए स्टार्टअप
जयपुर. मैं एक बहुत छोटी जगह से आई हूं। इंडियन एयरफोर्स में 23 साल देश की सेवा की है। क्योंकि हमारे दादाजी की परंपरा है, कि देश की सेवा करना जरूरी है। इसके बाद में भी मेरे मन में हमेशा से पर्यावरण के लिए कुछ करने की सोच थी। वर्षों फोर्स में रहने के बाद पर्यावरण के लिए काम करना शुरू किया और आज हम अलग-अलग पद्दति से खेती और पर्यावरण के लिए काम कर रहे हैं। ये कहानी है रंजनी अय्यर की, जिन्होंने पिंजरापोल गोशाला में चल रहे नेशनल मेले व राष्ट्रीय गो आधारित प्राकृतिक किसान सम्मेलन में अपनी सफलता के अनुभव साझा किए। उनके साथ ही अन्य कई सफल महिला—पुरुषों ने अपनी कहानी बताते हुए खेती व पर्यावरण को सुरक्षित रखने के बारे में बताया। उन्होंने गोधन को भी जरूरी बताया। इसमें किसी ने लाखों का पैकेज छोड़कर तो किसी ने कड़ा संघर्ष करके सफलता हासिल की।
आज हमारे खते हैं हरे-भरे
मैं टीबा की धरती झुंझुनू से हूं। हमें कहा गया था कि 20 साल तक भी जमीन पर कुछ नहीं उगेगा। हमने हिम्मत नहीं हारी और आज हमारे खेत हरे-भरे हैं। इसमें भी सिर्फ हम दो ही लोग ही हैं, जो खेती कर रहे हैं। ये कहानी है बंजर जमीन को हराभरा करने वाले रामेश्वर का। उन्होंने कहा कि पुराना तरीका गोबर से खेती करने का है। वहीं हम बायोडाजेस्ट से खेती कर रहे हैं, जिसमें खर्चा कम है और हर तरह की फसल तैयार की जा सकती है। ये पद्दति हम युवा किसानों को भी बता रहे हैं।
