रीढ़ की हड्डी में गोली लगने से घायल युवक 18 दिन बाद भी बेहोश है। यही वजह है कि अवैध पिस्तौल व कारतूस हासिल करने के पीछे क्या साजिश या मंशा थी इसका खुलासा अभी तक नहीं हो पाया है। उधर, पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता को पकड़ने के लिए लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी करवाया है।
थानाधिकारी देवेन्द्रसिंह देवड़ा का कहना है कि बीजेएस निवासी दिगम्बर सिंह पर हमले के मामले में दो नाबालिग को संरक्षण में लिया गया था। रसाला रोड निवासी शूटर नितिन उर्फ नवनीत व विकास उर्फ डेविल को गिरफ्तार किया गया था।
पूछताछ के बाद दोनों को जेल भेजा जा चुका है। नाबालिग भी बाल सुधार गृह में हैं। मुख्य आरोपी जेठूसिंह गड़ा, उम्मेदसिंह फौजी, शूटर की व्यवस्था करवाने में सहयोगी देवेन्द्रसिंह व अन्य अभी तक फरार हैं। वारदात के दौरान जेठूसिंह दुबई में था। ऐसे में उसको पकड़ने के लिए एलओसी जारी करवाया गया है।
गत वर्ष 20 अगस्त को रातानाडा भाटी सर्कल के पास हॉस्टल में कुछ युवकों ने छात्र नेता जेठूसिंह गड़ा पर जानलेवा हमला कर दिया था। दिगम्बर सिंह को गिरफ्तार किया गया था। जो गत छह जनवरी को जमानत पर जेल से छूटा था। तब से जेठूसिंह उसकी हत्या की फिराक में था।
उसने नागौर जिले में मूण्डवा थानान्तर्गत सैनणी गांव निवासी देवेन्द्रसिंह को हत्या की सुपारी दी थी। 50 हजार रुपए अग्रिम दिए गए थे। देवेन्द्रसिंह ने शूटर डेविल को सुपारी दे दी थी। डेविल ने नितिन व दोनों नाबालिग को साजिश में शामिल किया था। एक नाबालिग का दिगम्बर सिंह से सम्पर्क था। दिगम्बर सिंह को पिस्तौल व कारतूस की जरूरत थी।
इसके लिए उसे 10 मार्च की रात देर हनवंत गार्डन के पास बुलाया गया था। नितिन बाइक पर डेविल को वहां लेकर आया था। उधर, दिगम्बरसिंह कार में वहां पहुंचा तो दोनों हमलावर कार में सवार हो गए थे। फिर नीचे उतरने के दौरान डेविल ने दो फायर किए थे। एक दिगम्बरसिंह की गर्दन से होकर रीढ़ की हड्डी में फंस गई थी।
दिगम्बर सिंह पिस्तौल व कारतूस क्यों हासिल करना चाहता था? उसके निशाने पर कौन था? वह किस पर हमला करने की फिराक में था? यह अभी तक अनसुलझे ही हैं। हालांकि शूटर डेविल ने दिगम्बर सिंह के निशाने पर एक युवा राजनेता के होने की आशंका जताई है। फिलहाल वह एम्स में भर्ती है और होश नहीं आया है। उसके होश में आने के बाद ही पूरी कहानी स्पष्ट हो पाएगी।