आठवीं शताब्दी का है चौंसठ योगिनी मंदिर
आठवीं शताब्दी में चंदेल शासकों द्वारा ग्रेनाइट पत्थरों से किया गया था। यह मंदिर तांत्रिक विद्या का प्रमुख केंद्र रहा है, जिसमें चौंसठ योगिनियों की छोटी-छोटी मढ़ियां स्थित हैं। यह भारत के चौंसठ योगिनी मंदिरों में से सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। मातृ देवियों की मूर्तियां संग्रहालय में सुरक्षित
मंदिर के खंडहरों में मातृ देवी या मातृकाओं की तीन बड़ी मूर्तियां प्राप्त हुई थीं, जिन्हें अब खजुराहो संग्रहालय में सुरक्षित रखा गया है। इन देवियों में ब्राह्मणी, माहेश्वरी और हिंगलाज (महिषमर्दिनी) की प्रतिमाएं शामिल हैं। ब्राह्मणी की छवि में तीन चेहरे और उसका वाहन हंस दर्शाया गया है, जबकि माहेश्वरी को त्रिशूल और कूबड़ वाले बैल के साथ दिखाया गया है। महिषमर्दिनी की मूर्ति में वह भैंसे पर आसीन दिखाई देती हैं।
विश्व धरोहर में शामिल होने का प्रस्ताव
खजुराहो का यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता के चलते यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल सूची में शामिल होने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इसके जीर्णोद्धार के बाद इसे फिर से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा।पुरातत्व विभाग की इस पहल से न केवल इस प्राचीन धरोहर को संरक्षित किया जाएगा, बल्कि यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी ऐतिहासिक प्रेरणा स्रोत बना रहेगा। मंदिर के पुनर्निर्माण के बाद खजुराहो के पर्यटन को भी नई ऊंचाइयां मिलेंगी।