एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा के अनुसार अब तक के प्रश्न पत्रों से स्पष्ट है कि फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथमेटिक्स तीनों ही विषयों के संपूर्ण सिलेबस से प्रश्न पूछे जा रहे हैं। शिफ्टवार अलग-अलग टॉपिक्स व सब-टॉपिक्स को शामिल किया गया है, जिससे स्पष्ट है कि कोई भी टॉपिक छोड़ा नहीं जा सकता। सफलता के लिए सतत और संतुलित तैयारी, संपूर्ण सिलेबस का रिवीजन और टेस्ट्स में निरंतर भागीदारी जरूरी है।
कैमिस्ट्री को हल्के में लेना पड़ा भारी इस बार कैमिस्ट्री में मल्टी-कॉन्सेप्चुअल और एप्लीकेशन बेस्ड प्रश्न पूछे गए, जो पिछली बार की तुलना में कठिन रहे, सिर्फ फॉर्मूला व फैक्ट याद करने वाले छात्र असहज रहे।
फिजिक्स में भी सामान्य तैयारी नहीं आई काम फिजिक्स के पांचों प्रमुख भाग मैकेनिक्स, हीट एंड थर्मोडायनेमिक्स, इलेक्ट्रिसिटी एंड मैग्नेटिज्म, ऑप्टिक्स और मॉडर्न फिजिक्स से संतुलित प्रश्न पूछे गए। कॉलम मैचिंग जैसे प्रश्नों ने गहराई से समझ की परीक्षा ली।
मैथमेटिक्स : परंपरागत रूप से कठिन और लेंदी मैथ्स के प्रश्न पत्र इस बार भी लेंदी और कठिन रहे। कैलकुलस, अलजेब्रा, को-ऑर्डिनेट ज्योमैट्री, वेक्टर और 3-डी जैसे टॉपिक्स से भारी गणना आधारित प्रश्न पूछे गए। छात्र औसतन 7-8 प्रश्न ही हल कर सके।