मुरैना. रिठौरा थाना क्षेत्र में वन व राजस्व की भूमि में पत्थर की अवैध खदानें संचालित हैं। यहां बड़े स्तर पर अवैध उत्खनन हो रहा है, इसके चलते संरक्षित ऐतिहासिक धरोहरों को खतरा पैदा हो रहा है। अगर समय रहते माफिया के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो धरोहर के भवनों को क्षति हो सकती है।
रिठौरा थाना क्षेत्र में शनिचरा मंदिर, पढ़ावली गढ़ी, बटेश्वरा मंदिर, मितावली, पौढे वाले हनुमान जी मंदिर सहित अन्य ऐतिहासिक धरोंहरों के आसपास अवैध खदान चल रही हैं, जहां माफिया द्वारा शाम ढलते ही विस्फोट और मशीनरी के द्वारा पत्थर का खनन किया जाता है। यह अवैध कार्य रात भर चलता है। दिन भर खनन बंद हो जाता है, रात को बड़ी-बड़ी लालटेन और वाहनों से उजाला किया जाता है। पहले विस्फोट किया जाता है फिर जेसीबी सहित अन्य मशीनों से पत्थर अलग किया जाता है और ट्रॉली, ट्रक व डंपरों में भरकर सप्लाई की जाती है। तत्कालीन कलेक्टर विनोद शर्मा व एसपी विनीत खन्ना के कार्यकाल में अवैध पत्थर खदानों पर बड़ी कार्रवाई की गई थी, उस समय जेसीबी मशीन, डंपर, ट्रक सहित एक दर्जन के करीब वाहन जब्त किए थे। उक्त कार्रवाई को करीब आठ साल हो गई लेकिन अभी तक एक बार भी कोई कार्रवाई नहीं की गई है जिसके चलते माफिया के हौंसले बुलंद हैं।
वन व खनिज विभाग ने बताई एक-दूसरे की जमीन
रिठौरा थाना क्षेत्र में वन व राजस्व की भूमि में अवैध उत्खनन हो रहा है लेकिन वन विभाग के जिम्मेदार कह रहे हैं कि जहां अवैध उत्खनन हो रहा है, वह जमीन राजस्व विभाग की है। जबकि खनिज विभाग के अधिकारी उक्त जमीन को वन विभाग की बताकर कार्रवाई से पल्ला झाड़ रहे हैं। कार्रवाई को लेकर एक भी विभाग का अधिकारी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हैं।
खनिज विभाग के पास नहीं हैं खदानों का रिकॉर्ड
खनिज विभाग द्वारा पत्थर खदानों को लीज पर दिया जाता है लेकिन मुरैना खनिज विभाग द्वारा नियमानुसार वर्तमान में कितनी खदान वैध और किसको दी गई हैं, इसका विभाग के पास कोई रिकॉर्ड नहीं हैं। कई बार खनिज अधिकारी से जानकारी चाही गई लेकिन उन्होंने हर बार जानकारी न देते हुए बात को अनसुना कर दिया गया, इससे लगता है कि माफिया व विभाग की सांठगांठ से अवैध उत्खनन चल रहा है।
क्या बोले जिम्मेदार
रिठौरा क्षेत्र में जिन खदानों पर पत्थर का अवैध उत्खनन हो रहा है, वह वन भूमि में हैं, इसलिए कार्रवाई वन विभाग को ही करनी हैं।
एस के निर्मल, खनिज अधिकारी
रिठौरा क्षेत्र में जो पत्थर की जो भी खदान संचालित हैं, वह राजस्व की भूमि पर ही हैं, अगर हमारे क्षेत्र में होगी तो हम कार्रवाई करेंगे।
स्वेता त्रिपाठी, रेंजर, वन विभाग
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