तकनीक में अंतर न्यूरालिंक ने सबसे पहले ब्रेन चिप बनाई थी। यह दिमाग के अंदर लगाई जाती है, ताकि सिग्नल साफ मिलें। इसकी सर्जरी में खतरा ज्यादा है। सिंक्रोन और चीन की चिप दिमाग के ऊपर लगती है। इनमें दिमाग को नुकसान का खतरा कम है, पर सिग्नल थोड़ा कमजोर मिलता है।
अब दृष्टिहीनों के लिए न्यूरालिंक की ब्रेन चिप अब तक तीन मरीजों में लगाई जा चुकी है। न्यूरालिंक अब ‘ब्लाइंडसाइट’ नाम की चिप पर काम कर रही है। यह दृष्टिहीनों को देखने की ताकत दे सकती है। मस्क का कहना है कि बंदरों पर इसका परीक्षण कामयाब रहा है। इंसानों में परीक्षण में फिलहाल वक्त लगेगा।