सूत्रों के मुताबिक, आयकर विभाग ने ट्रस्ट द्वारा विश्वविद्यालय निर्माण में खर्च की गई करीब 350 करोड़ रुपये की रकम का स्रोत तलाशने की कोशिश की, लेकिन पर्याप्त जानकारी नहीं मिल सकी। नतीजतन, अब इस रकम पर टैक्स के साथ 30 प्रतिशत जुर्माना और ब्याज भी वसूला जाएगा।
छापों में मिले थे गड़बड़ियों के सुराग
करीब डेढ़ साल पहले आयकर विभाग द्वारा आज़म खां और उनके करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। उस दौरान विश्वविद्यालय निर्माण से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं के कई सबूत सामने आए। जांच को आगे बढ़ाते हुए विभाग ने केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) से विश्वविद्यालय के निर्माण की लागत का मूल्यांकन करवाया, जो कि करीब 450 करोड़ रुपये आंकी गई।
सिर्फ 100 करोड़ की रकम पाई गई वैध
जांच में सामने आया कि जौहर ट्रस्ट के खातों में सिर्फ 100 करोड़ रुपये की वैध प्राप्ति के प्रमाण ही मिले, जबकि शेष रकम के स्रोत के बारे में ट्रस्ट कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सका। चूंकि विश्वविद्यालय एक शैक्षणिक संस्था है, ट्रस्ट ने अब तक इस पर कोई आयकर नहीं चुकाया था। अवैध धन से निर्माण, अब होगी सख्त वसूली
विभागीय सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय के निर्माण में उपयोग की गई 350 करोड़ रुपये की अवैध धनराशि को लेकर अब आयकर विभाग सख्त रुख अपनाने जा रहा है। विभाग ट्रस्ट से इस रकम पर कर, 30% जुर्माना और ब्याज सहित लगभग 550 करोड़ रुपये की वसूली करेगा।