सिसोदिया ने कहा, “प्राइवेट स्कूलों की फीस में बढ़ोतरी भाजपा सरकार की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। सवाल ये है कि इस बढ़ी हुई फीस का कितना हिस्सा दिल्ली के मंत्रियों तक पहुंच रहा है?” शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनीष सिसोदिया ने भाजपा सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं को ठप करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “सरकार बनते ही मोहल्ला क्लिनिक बंद होने लगे हैं, अस्पतालों में दवाएं उपलब्ध नहीं हैं, और टेस्ट की सुविधाएं भी खत्म हो गई हैं।”
भाजपा पर लोगों को परेशान करने का लगाया आरोप
उन्होंने आगे कहा, “भाजपा रोज़ कुछ ना कुछ ऐसा कर रही है जिससे जनता परेशान हो। बिजली कटौती इसका हिस्सा है और अब स्कूलों की फीस बढ़ाकर लोगों की जेब काटी जा रही है।” अपने मंत्री कार्यकाल का ज़िक्र करते हुए सिसोदिया ने कहा, “हमने फीस पर नियंत्रण लगाया था और तय किया था कि कोई भी स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा सकेगा। कई स्कूल कोर्ट भी गए, लेकिन सरकार ने केस जीते और जनता के हितों की रक्षा की।” मनीष सिसोदिया ने कहा “आम आदमी पार्टी की सरकार में मैं शिक्षामंत्री था। मेरे कार्यकाल के दौरान दिल्ली सरकार के सबसे ज्यादा मुकदमे प्राइवेट स्कूलों के थे, क्योंकि आम आदमी पार्टी सरकार ने इनकी मनमानी पर रोक लगाई थी, लेकिन भाजपा ने सरकार में आते ही इन्हें खुला छोड़ दिया। अब दिल्ली में फीस के नाम पर पैरेंट्स लूटे जा रहे हैं। आपको दिल्ली के लोगों ने सरकार चलाने के लिए चुना है। आपको दिल्ली के लोगों ने चुनावी वादों के लिए चुना है।”
‘फीस माफिया’ पर सिसोदिया का प्रहार
मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया है कि भाजपा की सरकार बनने के साथ ही दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों को फीस बढ़ाने की खुली छूट मिल गई है। उन्होंने कहा “हर स्कूल 10 से 20 प्रतिशत तक फीस ऐसे ही बढ़ा रहा है। ये सामान्य नहीं, बल्कि सरकार और स्कूलों की मिलीभगत का मामला है। केजरीवाल सरकार के वक्त कोई स्कूल हिम्मत नहीं करता था फीस बढ़ाने की, लेकिन अब खुलेआम लूट हो रही है।” सिसोदिया ने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार का इस लूट से क्या रिश्ता है? मनीष सिसोदिया ने कहा “दिल्ली के लोगों को लूटने का खुला करप्शन शुरू हो गया है, जिसे अब एक्सपोज करना बेहद ज़रूरी है। इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए।” उन्होंने आगे कहा “ये सब एजुकेशन माफिया के जरिए हो रहा है, और इतनी बड़ी लूट सरकार की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। जांच का विषय यह भी होना चाहिए कि इस बढ़ी हुई फीस का कितना हिस्सा दिल्ली के मंत्रियों तक जा रहा है।”