जिले के प्रत्येक स्कूल में प्रवेश उत्सव का कार्यक्रम आयोजित किया गया। अतिथियों को आमंत्रित किया गया और अभिभावकों के साथ छात्रों का तिलक किया गया। स्कूल प्रबंधन और छात्रों ने बेनर के पीछे चलकर ग्रामीणों और शहरी मोहल्लों को शिक्षकों का उद्देश्य बताया गया। एक रोटी कम खाओं और बच्चों को शिक्षा दिलाओं की आवाज बुलंद की। छात्रों ने भी स्कूलों में बढ़ चढक़र भाग लिया। लेकिन छात्रों को पुस्तकें नहीं मिल पाई है।
स्कूलों को हाईटेक बनाने का बादा फेल हो गई है। इन दिनों वर्तमान में स्कूलों का निर्माण और मरम्मत कार्य बेहद धीमा चल रहा है। दो सालों से ३०० स्कूलों का मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इस कारण से उनमें कोई बदलाव नहीं आया है। यहां तक पीने के लिए पानी के लिए छात्रों को घर से बोतल और स्कूल में रखी बाल्टियों का सहारा लेना पड़ रहा है। जबकि जल जीवन मिशन के तहत जिले के प्रत्येक स्कूल में पानी की टंकी, पाइप लाइनों के साथ अन्य कार्य ध्वस्त हो गए है। जिसके कारण दरार खाई दीवारों के बीच स्कूलों में प्रवेश उत्सव मनाया गया है।
स्कूलों में नव प्रवेशी बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों द्वारा बच्चों को निशुल्क पुस्तकों का वितरण किया जाएगा। विभाग ने प्रवेश उत्सव में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, बच्चों के पालक ों को आमंत्रित किया गया। स्कूलों में बाल सभाओं का आयोजन किया गया। जिसमें अभिभावकों से अप्रेल महीने में छात्रों के नामांकन उपस्थिति,, उपलब्धि स्तर सहित अध्ययन, अध्यापन, की कार्य योजना पर चर्चा की गई। बच्चों के बीच खेल कूंद के साथ सांस्कृतिक कार्याक्रमों का आयोजन किया गया। बच्चों को विशेष मध्यान्ह भोजन वितरण किया गया।
मंगलवार को प्रवेश उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया गया है। जिन स्कूलों में पेयजल व्यवस्था नहीं थी। वहां पर पानी की व्यवस्था करवाई गई है। स्कूलों का मरम्मत कार्य जल्द ही किया जाएगा।जहां बिजली नहीं है वहां पर बिजली का कनेक्शन करवाया जाएगा। ७० फीसदी स्कूलों में किताबें पहुंचे चुकी है।
पीआर त्रिपाठी, डीपीसी टीकमगढ़।