-545 ऊंट आए तिलवाड़ा मेले में
32000 में बिका ऊंट, कम से कम 23000 पहुंचा
बाड़मेर पत्रिका.
तिलवाड़ा पशुमेले में इस बार ऊंट अधिकतम 3200 रुपए में बिका और कम से कम 23000 में। मेले में 545 ऊंट पहुंचे थे। पिछले साल के मुकाबले इस साल पांच सौ पशु अधिक पहुंचे। प्रशासन और राज्य सरकार के स्तर पर मेले को लेकर तीन महीने की प्लानिंग हों तो भारत प्रसिद्ध मेले में यह आवक आने वाले सालों में तीन से चार गुणा बढ़ सकती है।
श्री रावल मल्लीनाथ पशुमेला तिलवाड़ा में इस बार 2300 घोड़े, 545 ऊंट और 114 गोवंश पहुंचा। मेले में पिछले साल से करीब पांच सौ पशु अधिक पहुंचे। पशुओं की खरीद फरोख्त में घोड़ा अधिकतम 5.51 लाख रुपए में बेचा गया। वहीं ऊंट की अधिकतम कीमत 32000 रही है। ऊंट की कीमत जहां पिछले मेलों में 10 से 20 हजार तक आ गई है यह बड़ा बदलाव आया है।
मेले के बाद भी होगी बिक्री
मेले में आए महंगे घोड़ों की बिक्री अब होगी। यहां हरियाणा, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से आए बड़े व्यापारियों का आपस में यहां संपर्क हुआ है। उम्दा नस्ल के 25 से 50 लाख की कीमत के इन घोड़ों को शौकिया और रेस में उतारने के लिए खरीदा जाता है। इन घोड़ों की खरीद फरोख्त अब मेले के बाद में बड़े व्यापारी आपस में करेंगे।
सांसद विधायक कोष से मेले का हों विकास
मेले में इस साल 17 लाख से अधिक की आय हुई है। यह आय अगले मेले की व्यवस्था में यहीं व्यय होनी चाहिए। यह आय राज्य सरकार के खाते में पहुंच जाती है। विधायक व सांसद की ओर से भी सर्वजनहित के इस मेले के लिए हर साल विधायक कोष से 20 लाख और सांसद कोष से 30 लाख दिए जाए तो 50 लाख पशुपालकों के हित में व्यय होने से दोनों जिलों केा बड़ा लाभ मिलेगा।
यह बने प्लानिंग तो बढ़े और पशु
- यहां आने वाले आम पशुपालक को मेले में पानी, छाया और चारे की सुविधा तो मिलती है लेकिन यहां पशुपालक का ठहराव बढऩे के प्रयास नाकाफी रहे है। मेले के आयोजन से तीन माह पूर्व बाड़मेर-बालोतरा दो जिलों में कम से कम प्रचार-प्रसार अधिक हों तो पशुपालक यहां आ सकते है।
- पशुपालन विभाग की विभिन्न योजनाओं से पशुपालकों को लाभान्वित किया जा रहा है। जिसमें ऊंट के जन्म पर बीस हजार की राशि देय है। यह वितरण सालाना मेले में किया जाए और पशुपालक अपनी ऊंटनी को लेकर आए तो संख्या बढ़ेगी और इनकी खरीद फरोख्त के लिए भी लोग आएंगे।