यह स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योंकि जिला शिक्षा विभाग ने शासन द्वारा जारी गाइडलाइन को लागू करने में निष्क्रियता दिखाई है। अब तक किताबों की दुकानों का निर्धारण नहीं किया गया है, और अन्य निर्देशों को भी लागू नहीं किया गया है।
अभिभावकों की मजबूरी
नया सत्र शुरू होते ही कई निजी स्कूल पहले दिन से ही पढ़ाई शुरू कर देते हैं, जिससे अभिभावकों पर स्कूल खुलने से पहले ही किताबें और कॉपियां खरीदने का दबाव बन जाता है। इसी कारण अभिभावकों की भीड़ पहले से चिन्हित पुस्तक दुकानों पर उमड़ रही है। बताया जा रहा है कि इन चिन्हित दुकानदारों के पास अभिभावकों के मोबाइल नंबर उपलब्ध हैं, जिन पर वे व्हाट्सएप और फोन कॉल के जरिए किताबों से संबंधित सूचनाएं भेज रहे हैं, ताकि अभिभावक जल्दी से जल्दी किताबें खरीद लें। NCERT की जगह महंगी किताबें थोप रहे निजी स्कूल
निजी स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों को नजरअंदाज किया जा रहा है और केवल निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें ही लगाई जा रही हैं। एनसीईआरटी की किताबों की तुलना में निजी प्रकाशकों की किताबें तीन गुना तक महंगी होती हैं। कक्षा पहली और दूसरी के लिए किताबों का सेट ही दो से ढाई हजार रुपये का आता है, जबकि कक्षा छठी, सातवीं और आठवीं में यह पांच हजार रुपये से शुरू होता है। शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निजी स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें ही लगाई जाएं, लेकिन इस नियम का पालन नहीं हो रहा है।
बस्ते के बढ़ते बोझ से परेशान छात्र
बच्चों के स्कूल बैग के बोझ को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए हैं, लेकिन इनका पालन नहीं हो रहा है। शिक्षा विभाग ने उच्च अधिकारियों के निर्देश पर जांच दल का गठन किया था, लेकिन यह दल कभी स्कूलों तक पहुंचा ही नहीं। निजी प्रकाशकों की किताबों के कारण न केवल बच्चों के बस्ते का वजन बढ़ रहा है, बल्कि मानसिक और शारीरिक भार भी उन पर पड़ रहा है। अतिरिक्त और महंगी किताबों की अनिवार्यता के चलते बच्चों पर अनावश्यक पढ़ाई का दबाव बढ़ गया है।
स्कूल, दुकानदार और प्रकाशकों की साठगांठ
अभिभावकों का कहना है कि इस खेल में स्कूल और दुकानदार अकेले जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि शिक्षा विभाग के अधिकारी भी उतने ही दोषी हैं। कई निजी स्कूलों ने सीधे निजी प्रकाशकों से किताबें मंगवाकर केवल एक दुकान पर उपलब्ध कराई हैं। इस प्रक्रिया में स्कूलों को मोटा कमीशन मिल रहा है, जबकि दुकानदार कॉपी और अन्य सामान पर मुनाफा कमा रहे हैं।
अन्य दुकानदारों को किताबें देने से इनकार कर दिया जाता है या फिर उन्हें बहुत कम छूट दी जाती है, जिससे वे भी किताबों का बंडल बेचने को मजबूर हो जाते हैं।
जल्द जारी होगी गाइडलाइन
इस मामले पर जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. अनिल कुशवाह का कहना है कि एक-दो दिनों में निजी स्कूलों में किताबों और फीस को लेकर गाइडलाइन जारी की जाएगी। इसके लिए एक समिति भी गठित की जाएगी, जो शिकायतें मिलने पर जांच करेगी। गाइडलाइन का उल्लंघन करने वाले स्कूल संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।