Naxal Encounter: नक्सलवाद से जुड़ने के बाद परिवार से टूटा संपर्क
हालांकि, नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद 15 साल पहले
रेणुका ने उन्हें एक पत्र लिखा था, जिसमें उसने घर-परिवार का हालचाल पूछा था। राज ने आगे बताया कि दो भाइयों में रेणुका इकलौती बहन थी और वे सबसे छोटे हैं। लगभग 30 वर्षों से रेणुका नक्सली विचारधारा से जुड़ी हुई थी। संगठन में शामिल होने के शुरुआती दिनों में वह कभी-कभार घर आती थी, लेकिन बाद में पूरी तरह से नक्सलवाद से जुड़ने के बाद परिवार से संपर्क टूट गया। परिवार ने कई बार उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन उसका कोई असर नहीं हुआ।
प्रेस टीम की थी इंचार्ज
रेणुका ने एलएलबी की पढ़ाई की थी और वह नक्सली संगठन के लिए दस्तावेज तैयार करने का काम करती थी। पढ़ाई में मेधावी होने के कारण नक्सल संगठन ने 2020 में उसे डीकेएसजेडसीएम बनाकर सेंट्रल रीजनल ब्यूरो (सीआरबी) की प्रेस टीम का इंचार्ज बनाया था। वह नक्सल संगठनों की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी करने और विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं जैसे ‘प्रभात’, ‘महिला मार्गम’, ‘आवामी जंग’, ‘पीपुल्स मार्च’, ‘पोडियारो पोल्लो’, ‘झंकार’, ‘संघर्षरत महिला’, ‘पितुरी’, ‘मिडंगुर’ और ‘भूमकाल संदेश’ के मुद्रण व प्रकाशन का कार्य देखती थी।
बड़े भाई ने किया सरेंडर, पति मुठभेड़ में मारा गया
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नक्सली संगठन का बड़ा नाम हुआ करता था, लेकिन उसने 2014 में आत्मसमर्पण कर दिया। वह एक करोड़ का इनामी नक्सली था और आत्मसमर्पण के बाद मुयधारा में लौटकर फिलहाल दिल्ली स्थित बीबीसी में तेलुगु भाषा से संबंधित कार्य कर रहा है। वहीं, रेणुका के पति शंकामुरी अप्पाराव उर्फ रवि, जो नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था, 2010 में आंध्र प्रदेश के नल्लामल्ला में हुई मुठभेड़ में मारा गया था।