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हुबली

अपनी भाषा पर करें गर्व, घर पर करें मातृभाषा में बात

राजस्थान पत्रिका के हुब्बल्ली संस्करण के बीसवें स्थापना दिवस एवं राजस्थान दिवस के अवसर पर राजस्थान पत्रिका परिचर्चा का आयोजन किया गया। राजस्थान पत्रिका परिचर्चा का विषय था माटी से जुड़ाव: म्हारो प्यारो राजस्थान। इस विषय पर प्रवासियों ने राजस्थान की संस्कृति, रीति-रिवाज, परम्पराओं समेत अन्य विषयों पर अपनी बात रखी। प्रस्तुत हैं परिचर्चा के प्रमुख अंश:

हुबलीApr 03, 2025 / 06:10 pm

ASHOK SINGH RAJPUROHIT

गदग में आयोजित राजस्थान पत्रिका परिचर्चा में अपने विचार रखते प्रवासी।

गदग में आयोजित राजस्थान पत्रिका परिचर्चा में अपने विचार रखते प्रवासी।

गौरवशाली विरासत
राजस्थान, जिसे मरुप्रदेश भी कहा जाता है, अपनी संकृति, परंपरा, वीरता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। यह भूमि वीरों, संतों और कलाकारों की कर्मभूमि रही है। यहां की माटी में एक अनोखी सुगंध है, जो इसकी गौरवशाली विरासत को दर्शाती है। राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है, जो पश्चिम में पाकिस्तान, उत्तर में पंजाब, दक्षिण में मध्य प्रदेश और पूर्व में उत्तर प्रदेश व हरियाणा से घिरा हुआ है। इस राज्य का अधिकांश भाग थार मरुस्थल से आच्छादित है, जहां रेगिस्तानी जीवनशैली की अद्भुत झलक मिलती है। अरावली पर्वतमाला इस प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता को और बढ़ाती है।
राजस्थान की संस्कृति महान
प्रवासी समाज के लोगों ने कहा कि राजस्थान लोकनृत्य, लोकगीत और हस्तशिल्प पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। लोकनृत्यों में घूमर, कालबेलिया और चकरी नृत्य विशेष प्रसिद्ध हैं। राजस्थान का लोकसंगीत राजस्थानी जनजीवन की कहानियां बयां करता है। प्रवासियों ने कहा कि राजस्थान विभिन्न प्रकार के मेलों और त्योहारों का केंद्र है। उत्सव यहां की संस्कृति को जीवंत बनाते हैं। ये त्योहार न केवलधार्मिक आस्था बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी हैं।
बच्चों को राजस्थानी में बात करने के लिए करें प्रोत्साहित
राजस्थान जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के ट्रस्टी मोकलसर निवासी दलीचन्द कवाड़ ने कहा, हम घर पर अपनी मातृभाषा में बात करें। हमें अपनी भाषा पर गर्व होना चाहिए। साल में कम से कम एक बार राजस्थान जरूर जाएं। घर पर बच्चों को राजस्थानी में बात करने के लिए प्रोत्साहित करें।
माटी से जुड़ाव आज भी
राजस्थान जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के कार्यकारिणी सदस्य पादरू निवासी राजेश श्रीश्रीमाल ने कहा, माटी से जुड़ाव आज भी हैं। मैं साल में दो बार राजस्थान जाता हूं। दिसम्बर 2023 में पादरू में तीन दिवसीय सम्मेलन रखा गया था। इस सम्मेलन में गांव की बहन-बेटियां समूचे देश से आई थी। लोगों का आपस में मिलना हुआ।
राजस्थान का खान-पान निराला
संघ के सदस्य सिवाना निवासी महेन्द्र बन्दामूथा ने कहा, राजस्थान के खान-पान की बात ही निराली है। राजस्थान का सोगरा, दाल-बाटी अपने आप में अनूठी है। राजस्थान का खानपान सात्विक व स्वस्थ है। राजस्थान में शादी-ब्याह या विभिन्न सम्मेलनों के अवसर पर राजस्थान जरूर जाते हैं। इससे राजस्थान से लगाव बना रहता है।
बिजनेस की संभावनाएं बढ़ीं
अरटवाड़ा निवासी मुल्तानमल गादिया ने कहा, अब राजस्थान में भी बिजनेस की खूब संभावनाएं जगी हैं। राजस्थान से जुड़ाव बढ़ा है। मंदिर के ध्वजारोहण के लिए राजस्थान जाना होता है। इसके अलावा भी अन्य अवसरों पर राजस्थान जाते रहते हैं।
नाडोल में 9 जैन मंदिर
नाडोल निवासी रमेश बिदामिया ने कहा, नाडोल में हर साल गुरु मेला लगता है। तीन दिन तक विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं। मानदेव सूरी का यह मेला काफी प्रसिद्ध है। नाडोल में जैन समाज के करीब 550 परिवार है। नौ जैन मंदिर भी है।
जन्मभूमि से लगाव
माण्डानी निवासी गौतम खींवेसरा ने कहा, राजस्थान की संस्कृति महान है। यहां की भाषा, वेशभूषा अपनेपन का अहसास कराती है। दक्षिण में आने के बाद भी अपनी जन्मभूमि से लगाव बना हुआ है।
मिलता है सुकून
सिवाना के रमेश भंसाली ने कहा, राजस्थान की संस्कृति महान है। यहां का खान-पान निराला है। राजस्थान में जाकर जो सुकून मिलता है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है।

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