scriptसबसूं प्यारो, सबसूं न्यारो, म्हारो राजस्थान….भाषण प्रतियोगिता में असाड़ा की सारिका संकलेचा प्रथम, असाड़ा की विजेता भंसाली दूसरे एवं कनाना की सीमा कोठारी तीसरे स्थान पर रही | Sabsun pyaro, sabsun nyaro, maharo Rajasthan… In the speech competition, Sarika Sanklecha of Asada stood first, Bhansali, winner of Asada, stood second and Seema Kothari of Kanana stood third. | Patrika News
हुबली

सबसूं प्यारो, सबसूं न्यारो, म्हारो राजस्थान….भाषण प्रतियोगिता में असाड़ा की सारिका संकलेचा प्रथम, असाड़ा की विजेता भंसाली दूसरे एवं कनाना की सीमा कोठारी तीसरे स्थान पर रही

राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली संस्करण के बीसवें स्थापना दिवस एवं राजस्थान दिवस के अवसर पर लघु भाषण प्रतियोगिता में महिलाओं की सक्रिय सहभागिता रही। तेरापंथ महिला मंडल गदग की सदस्यों ने राजस्थानी भाषा में अपनी बात रखी।

हुबलीApr 02, 2025 / 02:51 pm

ASHOK SINGH RAJPUROHIT

राजस्थान पत्रिका के स्थापना दिवस पर गदग में आयोजित लघु भाषण प्रतियोगिता की विजेता प्रतिभागी एवं अन्य।

राजस्थान पत्रिका के स्थापना दिवस पर गदग में आयोजित लघु भाषण प्रतियोगिता की विजेता प्रतिभागी एवं अन्य।

राजस्थान अपनी अनूठी संस्कृति, इतिहास और भौगोलिक विशेषताओं के लिए प्रसिद्ध है। पधारो म्हारे देश, केसरिया बालम जैसे गीतों की मधुर धुनें जीवन को सुकून देती है। कालबेलिया, घूमर, चकरी जैसे लोकनृत्य मन मोह लेते हैं। राजस्थानी लोकगीतों की धुनों पर कलाकारों की कला अपने आप में अनूठी है। आमेर किला, चित्तौडग़ढ़ किला, कुम्भलगढ़ किला, जैसलमेर किला समेत राजस्थान में कई ऐतिहासिक किले अपनी समृद्धि की छाप छोड़ रहे हैं। राजस्थान की दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी का स्वाद ही अलग है। यहां का पुष्कर मेला, मरु महोत्सव, तीज, गणगौर समेत अन्य पर्व अपने आप में कई विविधताओं को समेटे हुए हैं।
राजस्थान दिवस पर गर्व
राजस्थान दिवस प्रदेश के इतिहास, संस्कृति और गौरव को सम्मानित करने का दिन है। यह हमें याद दिलाता है कि कैसे विभिन्न रियासतों के एकीकरण से यह राज्य बना और किस तरह इसकी संस्कृति ने पूरे भारत को प्रभावित किया। यह दिन हमें अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व करने और इसे संरक्षित करने के लिए प्रेरित करता है। 30 मार्च 1949 को विभिन्न रियासतों के विलय से राजस्थान राज्य का गठन हुआ था और इसे एकीकृत राज्य के रूप में मान्यता मिली थी। स्वतंत्रता से पहले राजस्थान कई रियासतों में विभाजित था, जिन्हें ब्रिटिश शासन के अधीन ‘राजपूताना’ कहा जाता था। भारत की स्वतंत्रता के बाद इन रियासतों को एकीकृत करने की प्रक्रिया शुरू हुई। राजस्थान के एकीकरण की प्रक्रिया में कुल 19 रियासतें और 3 ठिकाने यानी छोटे स्वतंत्र राज्य शामिल थे। अंतत: 30 मार्च 1949 को राजस्थान को एक पूर्ण राज्य के रूप में स्थापित किया गया और जयपुर को इसकी राजधानी बनाया गया।
परम्पराओं का उत्सव
राजस्थान दिवस केवल एक ऐतिहासिक घटना की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर, वीरता और परंपराओं का भी उत्सव है। यह दिन हमें उन महान राजाओं, योद्धाओं और स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है, जिन्होंने इस भूमि की रक्षा और उन्नति के लिए अपना योगदान दिया। राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली संस्करण के बीसवें स्थापना दिवस एवं राजस्थान दिवस के अवसर पर लघु भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में तेरापंथ महिला मंडल गदग की सक्रिय सहभागिता रही।
कला एवं संस्कृति समेत हर पक्ष को उकेरा
प्रतियोगिता में महिलाओं ने राजस्थान की कला एवं संस्कृति, पर्व-त्योहार, रीति-रिवाज एवं परम्पराओं के बारे में प्रकाश डाला। नीकिता राजपुरोहित निर्णायक थीं। इस अवसर पर शोभा संकलेचा असाड़ा, श्यामा देवी संकलेचा असाड़ा एवं ममता देवी संकलेचा असाड़ा भी उपस्थित थीं। प्रतियोगिता की विजेताओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। प्रतियोगिता के प्रारम्भ में राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजपुरोहित ने प्रतियोगिता के नियमों के बारे में जानकारी दी।
  • ये रहे विजेता:
  • सारिका संकलेचा असाड़ा प्रथम
  • विजेता भंसाली असाड़ा द्वितीय
  • सीमा कोठारी कनाना तृतीय
  • मधु संकलेचा असाड़ा प्रोत्साहन पुरस्कार

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