script85 साल पहले बंगाल से लाकर स्थापित की थी काली माता की प्रतिमा, आज आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है यह मंदिर | 85 years ago, the idol of Kali Mata was brought from Bengal and installed, today this temple has become a major center of faith. | Patrika News
जयपुर

85 साल पहले बंगाल से लाकर स्थापित की थी काली माता की प्रतिमा, आज आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है यह मंदिर

1940 में बंगाली बाबा बांग्लादेश से लाए थे काली माता की मूर्ति
स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों से बचने के लिए लेते थे आश्रय

जयपुरApr 05, 2025 / 02:16 pm

Devendra Singh

History of Kali Mata Temple Jaipur

History of Kali Mata Temple Jaipur

देवेंद्र सिंह / जयपुर. आज के आदर्श नगर इलाका, जिसे पहले फतह टीबा के नाम से जाना जाता था, अब एक ऐतिहासिक और धार्मिक केंद्र बन चुका है। यहां स्थित काली माता का मंदिर न केवल जयपुर, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुका है। यह वही स्थान है, जहां कभी संतों की तपोस्थली हुआ करती थी और राजा-महाराजा भी मस्त बाबा के आश्रम से आशीर्वाद लेने यहां आते थे।
85 Years of Kali Mata Temple

काली माता मंदिर बना आस्था का केंद्र 

यह मंदिर 85 साल पहले एक छोटे से कदम से शुरू हुआ था, जब महान संत बाबा महानंद भारती (जिन्हें बंगाली बाबा के नाम से जाना जाता है) बाल्यावस्था में 1940 में बांग्लादेश से काली माता की एक छोटी प्रतिमा लेकर जयपुर पहुंचे। बाबा ने यह प्रतिमा अपने साथ लाकर मस्त बाबा के आश्रम में स्थापित की और वहां लगातार मां काली की आराधना शुरू की। लोग उन्हें ‘बंगालीबाबा’ के नाम से पहचानने लगे और जल्द ही उनका नाम पूरे इलाके में फैल गया। आज वह आश्रम, जिसे पहले सिर्फ मस्त बाबा के धूने के रूप में जाना जाता था, अब एक भव्य काली माता के मंदिर के रूप में श्रद्धालुओं के बीच प्रसिद्ध है।

35 साल की तपस्या की गवाह पुजारी सुमिता चौधरी

मंदिर की पूजा अर्चना में 35 साल से समर्पित पुजारी सुमिता चौधरी ने बताया कि 1940 से पहले यहां सिर्फ एक पुराना शिवालय, भैरूजी का मंदिर और मस्त बाबा का धूणा था। बंगाली बाबा ने 1980 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। पुराने मंदिर की जगह एक विशाल और भव्य मंदिर का निर्माण हुआ, जिसमें आदमकद काली माता की मूर्ति के साथ काली माता की छोटी प्रतिमा स्थापित की गई। साथ ही अपने साथ लाई काली माता की प्रतिमा को भी इसके साथ ही स्थापित करवाया। यही नहीं, बाबा ने मंदिर के पास शिव परिवार का भी मंदिर बनवाया, और इस प्रकार अब इस मंदिर में शिव और शक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहां की मान्यता है कि जहां शिव और शक्ति एक साथ हों, वहां कोई भी बुरी ताकत पांव नहीं पसार सकती।

विदेश से भी भक्त भी आते है माता के दरबार में

यह मंदिर अब केवल जयपुर ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। राधा राय चौधरी ने बताया कि हर साल नवरात्रों के दौरान, अमेरिका, लंदन, कनाडा जैसे देशों से भी भक्त यहां आते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि काली माता उनके दुखों का निवारण करती हैं और उन्हें कभी भी खाली हाथ नहीं लौटने देतीं।
 85 Years of Kali Mata Temple

स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी ऐतिहासिक गाथा

एक समय था जब फतेह टीबा क्षेत्र में घना जंगल हुआ करता था और यह श्मशान भूमि हुआ करती थी। अंग्रेजों से बचने के लिए स्वतंत्रता सेनानी यहां आकर आश्रय लिया करते थे। इस आश्रम के आसपास कोई आबादी नहीं थी, जिससे यह क्षेत्र सेनानियों के लिए एक सुरक्षित स्थल बन गया था। वे यहां आकर कई दिनों तक यहां रह कर आगे की रणनीति बनाते थे। यहां तक कि घने जंगल में सुबह और शाम शेर, बाघ, और हिरण भी कुएं पर पानी पीने आते थे। अब वही स्थान काली माता के मंदिर के रूप में श्रद्धा का केंद्र बन चुका है।

नवरात्र में होते हैं विशेष आयोजन

जयपुर के इस मंदिर में हर साल नवरात्र के दौरान विशेष पूजा आयोजित होती है, जिसमें विद्वान पंडितों से दुर्गा सप्तशक्ति का पाठ करवाते हैं। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष हवन का आयोजन भी किया जाता है। इस दौरान मंदिर में भक्तों की भीड़ लग जाती है और चमत्कारिक अनुभवों की कथाएं सुनने को मिलती हैं। जयपुर की यह भूमि ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रही है। कई संतों ने यहां अपनी तपस्या की है, और उनके आशीर्वाद से यह स्थान आज एक पवित्र तीर्थ बन चुका है। जो लोग इस स्थान पर आते हैं, उन्हें न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि जीवन में एक नई दिशा भी मिलती है।

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