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जयपुर

Mahashivratri 2025 : कैलाश पर्वत पर ध्यान करेंगे भोलेनाथ, बर्फीली गुफाओं के बीच भक्तों को देंगे दर्शन

Mahashivratri 2025 : आदिदेव महादेव की साधना के महापर्व महाशिवरात्रि पर छोटीकाशी में भक्त शिवभक्ति में लीन रहेंगे।

जयपुरFeb 26, 2025 / 08:16 am

Alfiya Khan

mahashivratri
जयपुर। आदिदेव महादेव की साधना के महापर्व महाशिवरात्रि पर बुधवार को छोटीकाशी में भक्त शिवभक्ति में लीन रहेंगे। प्राचीन शिवालयों सहित अन्य शिव मंदिरों में ‘हर हर महादेव…’ और ‘ऊं नम: शिवाय…’ का उद्घोष सुनाई देगा। ब्रह्म मुहूर्त में शिवालयों के पट खुलते ही श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करेंगे।
रात्रि तक मंदिरों में शिव भक्तों का रेला उमड़ेगा। विशेष योग-संयोग में भोलेनाथ की पूजा की जाएगी। पंचामृत अभिषेक के साथ ही भक्त प्रयागराज स्थित त्रिवेणी व हरिद्वार से मंगाए पवित्र जल से अभिषेक करेंगे। बर्फ से झांकियां भी सजाई जाएंगी। भोलेनाथ कहीं बाबा बर्फानी के रूप में नजर आएंगे तो कहीं कैलाश पर्वत पर ध्यान मुद्रा में दर्शन देंगे।
शिवालयों में चार प्रहर की पूजा की जाएगी। वर्ष में एक बार खुलने वाला मोती डूंगरी की पहाड़ी पर स्थित एकलिंगेश्वर महादेव मंदिर इस साल भी बंद रहेगा। भक्त सिटी पैलेस स्थित राजराजेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन कर सकेंगे। चमत्कारेश्वर महादेव व खोले के हनुमान जी स्थित शिवालय में भक्त अलग-अलग ज्योर्तिलिंगों के दर्शनों के लिए पहुंचेंगे। यहां शिवजी की प्रतिमा अर्द्धनारीश्वर रूप में है।

झाड़खंड महादेव मंदिर

वैशाली नगर स्थित मंदिर में सुबह 4:30 बजे से रात 12 बजे तक पट खुले रहेंगे। शाम चार बजे तक भक्त जलाभिषेक कर सकेंगे। थाईलैंड-बेंगलूरु से मंगाए फूलों से झांकी सजाई जाएगी। 200 से अधिक स्वयंसेवक व्यवस्थाएं संभालेंगे। बुजुर्गों के लिए ई-रिक्शा की व्यवस्था रहेगी। भजन संध्या में भोलेनाथ का गुणगान किया जाएगा।

ताड़केश्वर महादेव

चौड़ा रास्ता स्थित ताड़केश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालु ब्रह्म मुहूर्त से ही भोलेनाथ का जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक कर सकेंगे। यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहेगा। इसके बाद विशेष झांकी सजाई जाएगी व चार प्रहर की पूजा भी होगी।

बिल्वपत्र, गंगाजल का होगा वितरण

चमत्कारेश्वर महादेव (झोटवाड़ा रोड), जंगलेश्वर महादेव (बनीपार्क), रोजगारेश्वर महादेव (छोटी चौपड़), द्वादश ज्योतिर्लिंगेश्वर सदाशिव महादेव मंदिर (कूकस) में बिल्वपत्र, गंगाजल वितरण होगा। सभी शिवालयों में भोलेनाथ का विशेष शृंगार कर झांकी सजाई जाएगी।

भगवान शिव-पार्वती का विवाह

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को ही भगवान शिव-पार्वती का विवाह हुआ था। जो व्यक्ति महाशिवरात्रि का विधिवत पूजन, रात्रि जागरण और उपवास करता है उनका पुनर्जन्म नहीं होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि शिव पूजा के साथ व्रत कर यथाशक्ति दान करने से एक हजार अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है।
पं.चंद्रमोहन दाधीच, ज्योतिषाचार्य

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