2008 के बाद बने थे कड़े कानून
गौरतलब है कि वर्ष 2008 में बॉर्डर को बेचने के प्रकरण के बाद सीमावर्ती थाना क्षेत्रों में प्रवेश के लिए क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट 1996 को सख्ती से लागू किया गया था। लेकिन आज स्थिति यह है कि न तो प्रवेश अनुमति की निगरानी हो रही है और न ही संदिग्धों की पड़ताल। फैक्ट फ़ाइल
- 470 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा जैसलमेर से लगती है
-350 गांव ऐसे, जहां प्रवेश के लिए अनुमति जरूरी
-8 थाना क्षेत्र प्रतिबंधित श्रेणी में
स्थानीय लोग नहरी क्षेत्रों में मजदूरी, कृषि व पशुपालन से जुड़े
नाकाबंदी करते हैं, कर रहे जागरूक भी
नहरी क्षेत्र में आबादी चकों में बंटी हुई है। यहां पुलिस की ओर से नाकाबंदी की जाती है। नाकाबंदी के दौरान वाहन चालकों व स्थानीय निवासियों को किसी भी घटना या संदिग्ध की सूचना देने के लिए जागरूक किया जाता है। सीएली सदस्यों, पुलिस मित्र, सुरक्षा सखी, मुखबिर की सूचना के माध्यम से क्षेत्र की निगरानी करने का प्रयास किया जाता है। — नरेंद्र पंवार, थानाधिकारी, पुलिस थाना पीटीएम
बीट कांस्टेबल करते हैं पूछताछ
सीमावर्ती क्षेत्र में अन्य राज्यों से आने वाले व्यक्तियों के लिए बीट कांस्टेबल नियुक्त करके रखा है वह अन्य राज्यों से आने वाले व्यक्तियों से पूछताछ करता है। -गजेंद्रसिंह चम्पावत, पुलिस उप अधीक्षक, नाचना