विवाद सामने आने के बाद विजय आदित्य सिंह जूदेव शुक्रवार को कुनकुरी के बेहराटोली निवासी पीड़ित छात्रा अमीषा बाई से मिलने पहुंचे। यहां पीड़िता ने उन्हें बताया कि हिंदू धर्म को मानने वाली छात्रा है और नर्सिंग कोर्स के अंतिम वर्ष में है। उसने आरोप लगाया कि कॉलेज की प्राचार्य विंसी जोसेफ ने कई बार धर्मांतरण के लिए दबाव बनाया और नन बनने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दिए।
जब उसने इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया, तो प्राचार्य ने उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। पीड़ित छात्रा का आरोप है कि नर्सिग कालेज में प्रवेश लेने के बाद से ही प्राचार्य सिस्टर जोसेफ उस पर नन बनने का दबाव डाल रही थी।
पीड़िता अमिषा ने बताया कि उसकी बड़ी बहन दुर्गेश्वरी बाई भी एक साल पहले इसी कालेज से नर्सिंग पास हुई है। लेकिन 15 हजार की फीस बकाया बता कर प्राचार्य ने उसे पंजियन प्रमाण पत्र नहीं दिया। दुर्गेश्वरी इन दिनों रायपुर के एक नीजि नर्सिंग होम में नौकरी कर रही है। लेकिन पंजियन प्रमाण पत्र ना होने से उसे कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। पीड़िता का आरोप है कि दुर्गेश्वरी की पढ़ाई पूरी होने के बाद
नर्सिंग कॉलेज ने लगभग 6 माह तक अस्पताल में दुर्गेश्वरी से नौकरी कराया लेकिन वेतन के नाम पर एक रुपया भी नहीं दिया। अब 15 हजार रुपए फीस बकाया बता कर पंजियन प्रमाण पत्र देने में आनाकानी कर रहे हैं।
पीड़िता से चर्चा के बाद विजय आदित्य सिंह जूदेव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विवादित संस्था की तत्काल मान्यता रद्द कर संस्था के गेट पर ताला लटकाने की मांग की है। मांग पूरी ना होने हजारो समर्थकों के साथ सड़क में उतरने की चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि, धर्मांतरण कराने वाले मिशनरी संस्थाओं को अब सबक सिखाने का समय आ गया है। अमीषा जैसी छात्राओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना, धर्म बदलने के लिए मजबूर करना और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करना निंदनीय है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रशासन को तुरंत इस मामले में सत कार्रवाई करनी चाहिए, अन्यथा हम बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ बड़ा आंदोलन करेंगे।