जिले में फिर अधूरी तैयारी के बीच 1 अप्रेल से नया शिक्षा सत्र शुरू हो जाएगा। तैयारी के बीच स्कूलों की बदहाली की तस्वीरें सामने आ रही हैं। बच्चों की कमी से जूझते कई स्कूल बंद होने के कगार पर हैं, तो कहीं शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है। गर्मी के इस मौसम में बच्चों को बिना पंखे के कक्षाओं में बैठना पड़ेगा। दूसरी तरफ जिले में रोजगार न मिलने के कारण हजारों की तादाद में लोग रबी व खरीफ सीजन की कटाई में पयालन कर जाते हैं। जिससे कई माह तक हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
52 स्कूलों में नहीं एक भी शिक्षक
जिले के 52 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं हैं। इसमें बहोरीबंद के अमाड़ी, पथराड़ी पिपरिया, कूड़ा घनिया, खमतरा, जुजावल, संसारपुर, भूमियाटोा, चांदनखेड़ा, जरुआखेड़ा, टिकरिया, सिजहरी, कटनी का जोबा, बड़वारा में घ्रेला, लखाखेरा, पठरा, मगरहटा, गुड़ा, ककरीटोला मझगवां, सुड्डी, भदौरा-2, गणेशपुर, बगैहा, करछुलहा, बनगवां, रीठी का खिरवाटोला, विगढ़ का टीकर, कारीतलाई, बम्होरी, सिनगौड़ी, खलवारा बाजार में, ढीमरखेड़ा के घुघरी, कारीपाथर, पिपरिया शुक्ल, मॉडल, बरही, बनेहरा, महेगवां, पौनिया, बडख़ेरा, छीतापल, भोपार, कोठी, खमरिया बागरी, गनियारी, सनकुई, गुंडा, भैंसवाही, भलवारा, हरदुआ, चपोहला शामिल है।
वर्ष कक्षा 10वीं 12वीं
2024 66.26 71.11
2023 59.32 35.84
2022 55.86 71.31
2020 53.79 63.29
2019 54.82 74.03
2018 44.10 62.94
2017 44.10 56.32
2016 43.96 60.42 2015 44.19 61.87 यह है शिक्षकों की स्थिति
पद पद संरचना कार्यरत रिक्त
वर्ग-1 1169 285 884
वर्ग-2 2702 906 1796
योग 7784 4544 3240
बिन गणवेश, पुस्तक व साइकिल की शिक्षा!बच्चों को स्कूल खुलते ही गणवेश, पुस्तक व साइकिल मिल जाना चाहिये, लेकिन किसी भी सत्र में शिक्षा विभाग व प्रशासन सुविधाएं समय पर मुहैया नहीं करा पाता। आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ दिनों पहले ही विद्यार्थियों को गणवेश की राशि दी गई है, जबकि शैक्षणिक सत्र खत्म हो गया है। 1 अप्रेल से नया सत्र शुरू होने वाला है। यही हाल पुस्तकों के वितरण में रहता है। आधे साल तक शत-प्रतिशत वितरण नहीं हो पाता। साइकिल वितरण को लेकर भी से मैपिंग तक नहीं हो पाती, कई माह का सत्र बीत जाने के बाद छात्र-छात्राओं को साइकिल व बांटी जाती हैं।

आपको जानकारी हैरानी होगी कि 2021-22 कक्षा पहली में 16 हजार 953 बच्चे, 2022-23 में 13 हजार 147 बच्चे, 2023-24 में 12 हजार 434 बच्चे अध्ययन कर रहे थे। इस बार मात्र 3 हजार 486 बच्चों का प्रवेश हुआ है। इसकी मुख्य वजह यह है कि उप सचिव मप्र शासन स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आदेश क्रमांक 394/1565686/2023/20-2 निकाला गया है 28 फरवरी 2024 को, जिसमें 1 अप्रेल की स्थिति में नर्सरी स्कूल में बच्चे की उम्र 3 वर्ष, केजी-1 में 4 वर्ष, केजी-2 में 5 वर्ष व कक्षा एक के लिए 6 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसके कारण 30 फीसदी से भी अधिक प्रवेश कम हो गए हैं। सभी बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढऩे को विवश हो गए हैं।
- 23 हाई व हॉयर सेकंडरी स्कूल हैं भवन विहीन।
- 176 स्कूल में से 52 में ही हैं प्राचार्य, सभी में हैं प्रभारी।
- 23 हाइ व हॉयर सेकंडरी स्कूल हैं शून्य शिक्षक।
- कई स्कूलों में शिक्षक नहीं जा रहे पढ़ाने।
- अधिकारियों की निगरानी न होने से हो रही मनमानी।
- 200 से अधिक स्कूलों को मरम्मत की दरकार
- 2023-24 में 102 स्कूलों के मरम्मत के लिए मिली थी राशि।
- 137 जिले के ऐसे स्कूल जिनमें नहीं है बाउंड्रीवॉल
कक्षा सरकारी प्राइवेट
एक 13235 6641
दूसरी 16926 7338
तीसरी 15117 6676
चौथी 16554 7002
पांचवीं 16017 7137
छठवीं 16625 6791
सातवीं 17839 6318
आठवीं 17981 6338
नौवमी 19152 5599
दसवीं 11572 4730
ग्यारवीं 10806 3360
बारहवीं 9270 4282
यह है तीन वर्षों की स्थतिवर्ष सरकारी प्राइवेट
2024-25 180896 72212
2023-24 171746 77121
2022-23 181094 75749

जिले में कई प्राथमिक, माध्यमिक व हाई-हॉयर सेकंडरी स्कूल ऐसे हैं जहां पर विद्यार्थियों को बैठने तक की सुविधा नहीं हैं। कई भयावह तस्वीर भी सामने आ चुकी हैं। बारिश के सीजन में शहर से चंद किलामीटर दूर स्थित ग्रायत्री तपोभूमि स्कूल की सामने आई थी, जहां पर बच्चे छाता लगाकर पढ़ाई कर रहे थे। इस प्रकार मदनपुरा स्कूल में भवन न होने से चतूबतरे में स्कू लग रहा था। बड़वारा क्षेत्र के भुड़सा स्कूल में भी कक्ष न होने से पेड़ के नीचे कक्षाएं लग रहीं थीं। बाकल क्षेत्र में भी ऐसी तस्वीर सामने आ चुकी है, इसके बाद भी जिम्मेदार गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे।
सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का बेहद अभाव है। 80 फीसदी स्कूलों में गर्मी से बचने के लिए पंखे या अन्य उपाय नहीं हैं। स्कूलों में शुद्ध पेयजल, शौचालय और खेल के मैदान जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी हुई है। एक कक्ष में दो-तीन कक्षाएं भवन व शिक्षकों की कमी के कारण लगती हैं। इसी प्रकार फर्नीचर की सुविधा न होसे बच्चे जमीन में बैठकर पढऩे को विवश हैं।
25 स्कूलों को इस सत्र इन स्कूलों को बंद करने की तैयारी
इस सत्र से 25 स्कूलों को बंद करने की तैयारी में शिक्षा विभाग है। इसकी मुख्य वजह कम दर्ज संख्या है। रीठी विकासखंड के महरगवां में 10 बच्चे, बरगवां में 8, रैपुरा में 18, मड़ैया हथकुरी में 18, चिखला में 11, टिहकारी में 16 बच्चे व झाराखेड़ा में 5 बच्चे दर्ज हैं। बड़वारा ब्लॉक के नैगवा टोला में 20 बच्चे, कनिष्ट प्राथमिक शाला भादावर में 16, पीएस पुरैनी टोला 12 हैं। बहोरीबंद के गुना 7 बच्चे, खिरवा टोला 13, धवाड़ी खेड़ा 9, इमलीगढ़ 16, मोहाई 15, मड़ैय्यन टोला 19, कजलीवन 13, विजयराघवगढ़ ब्लॉक के पचमठा में 9, बदेरा में 6, हरदुआकला 12, देवसरी इंदौर 12 बच्चे, ढीमरखेड़ा ब्लॉक में सगवां 18, कंजिया 19, धौरेसर 16, केवलारी 17 होने के कारण बंद करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

- 2023 में जीरो नामांकन होने पर तीन सरकारी स्कूलों को कराया जा चुका है बंद।
- 2013 में भी जिले में 09 स्कूलों को बंद करने जारी किया जा चुका था आदेश।
- सचिव स्कूल शिक्षा विभाग के पत्र क्रमांक 44/4/2013/20-2/3966 के तहत पहल।
- 02 स्कूलों को सीएम राइज स्कूल में मर्ज करने के कारण भी कर दिया गया है बंद।
- प्रशासन द्वारा पूर्व के वर्षों में मिशन-45 आधार बुकलेट, फाइनल-30 चलाया था अभियान, इस साल नहीं हुई कोई खास पहल।
- स्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रही पढ़ाई, शिक्षकों की कमी के कारण भी जिले में शत-प्रतिशत नहीं आ रहा परिणाम।
- अधिकांश शिक्षकों द्वारा पढ़ाई न कराने, राजनीति में सक्रिय रहने से बिगड़ रहा परिणाम, शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही शिक्षक नहीं कराते शत-प्रतिशत परिणाम के लिए तैयारी।
- बजट के अभाव के कारण स्कूलों में नहीं हो पाते रंगरोगन सहित अन्य विकास कार्य।
- बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी नहीं हो रही कोई सक्रिय पहल।
- स्कूलों में बनीं है पालक शिक्षक समितियां, लेकिन नहीं दे रहीं गंभीरता से ध्यान।
सरकारी स्कूलों की हालत में बड़े सुधार की आवश्यकता है। जरुरत के अनुसार विषय शिक्षकों की पदस्थापना के साथ नियमित उपस्थिति व पढ़ाई करानी होगी। छात्र-शिक्षक अनुपात में संतुलन बनाना होगा। शिक्षा के साथ स्कूल का वातावरण भी महत्वपूर्ण होता है। स्कूलों में साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय और खेल सामग्री की पर्याप्त व्यवस्था की जानी चाहिए। स्मार्ट क्लास और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा, बच्चों की उपस्थिति और ड्रॉपआउट रोकने के उपाय अपनाने होंगे। मिड-डे मील की गुणवत्ता को बेहतर किया जाए। जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों की उपस्थिति बढ़ाई जाए। शिक्षा में माता-पिता और समाज की भागीदारी तय की जाए। मूल्य आधारित शिक्षा पर जोर हो और वार्षिक मूल्यांकन बेहतर और पारदर्शिता हो।
रामाधार गौतम, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक।
परीक्षाएं खत्म होते ही नए शैक्षणिक सत्र में जिले में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए रिव्यू किया जाएगा। प्रवेश को लेकर तैयारी चल रही है। शिक्षकों की मांग सहित बुनियादी सुविधाओं के लिए पहल की जाएगी। हर किसी की जवाबदेही तय की जाएगी।
पीपी सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी।