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निजी स्कूलों की दुकान फिर शुरू, प्राइवेट सिलेबर्स के नाम पर पालकों से लूट

नर्सरी से पांचवी तक का सिलेबर्स 2500 से 3500 रुपए का, स्कूल संचालकों की निजी पब्लिकेशन, यूनिफार्म दुकानदारों के साथ पार्टनरशिप, शिक्षा विभाग नहीं करता कार्रवाई

मोरेनाMar 27, 2025 / 03:03 pm

Ashok Sharma

मुरैना. शासन की रोक के बाद भी प्राइवेट स्कूल संचालकों ने एनसीईआरटी के साथ निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की दुकान तय कर ली हैं। पालकों को उन्हीं फिक्स दुकानों से ही किताब लाने को कहा जाता है, वहां पहले से सैट बने हुए रखे हैं कि जिसमें प्राइवेट पुस्तक भी शामिल हैं, उन पुस्तकों के दुकानदार द्वारा मनमाने रेट लिए जा रहे हैं। पालक मजबूरन खरीद रहे हैं। जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
शासन के सख्त निर्देश हैं कि सरकारी के साथ प्राइवेट स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकें ही चलाई जाएं। लेकिन प्राइवेट स्कूल संचालकों ने अपनी अपनी दुकान फिक्स कर दी हैं और पालकों को स्कूल से पर्ची थमा दी जाती है कि जिसमें दुकान का एड्रेस लिखा रहता है। पालक जब उन दुकानों पर पहुंचता है तो नर्सरी से पांचवी तक 2500 से 3500 लेकर पुस्तकों को सेट दे दिया जाता है। इसमें स्कूल संचालक का कमीशन फिक्स रहता है। शिक्षा विभाग, स्कूल संचालक व दुकानदारों के गठबंधन से पालकों की जेब ढीली की जा रही है। वहीं स्कूल संचालकों द्वारा हर साल यूनिफार्म बदल दी जाती है, उसके लिए भी उन्होंने दुकान फिक्स कर रखी हैं, जिससे पालकों पर एक्स्ट्रा लोढ़ पड़ रहा है।

कागजों तक सिमटी हिदायत

निजी स्कूल संचालकों को सख्त हिदायत है कि स्कूल में केवल एनसीईआरटी अथवा राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा अधिकृत किताबें ही चलाई जाएं। निजी प्रकाशकों की किताबे चलाने से बच्चों के बस्तों का बोझ बढ़ता है। इसके बाद भी प्राइवेट स्कूल संचालक खुलेआम बुक स्टोर संचालक से निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की बिक्री के नाम पर मोटा कमीशन कमा रहे हैं।

सिर्फ दुकानदारों पर गिरती है गाज, स्कूल संचालकों पर नहीं

शासन के निर्देशों के हवाला देते हुए अधिकारी जब कार्रवाई करते हैं तो पुस्तक विक्रेताओं पर गाज गिरती है लेकिन स्कूल संचालक फिर भी बच जाते हैं। वर्तमान में मुरैना में पदस्थ तहसीलदार ने पिछले सत्र में कार्रवाई की तो दो तीन दुकानों को सील किया गया था लेकिन स्कूल संचालकों पर कोई कार्रवाई नहीं की।

सैट में सिर्फ तीन या चार किताब एनसीईआरटी की

प्राइवेट स्कूल संचालकों ने जो दुकान फिक्स की हैं, उन पर पहले से नर्सरी से लेकर कक्षा पांचवीं तक सैट तैयार रखे मिलते हैं। उस सैट में तीन या चार किताब एनसीईआरटी की होती हैं अन्य पुस्तकें निजी प्रकाशकों की रहती हैं। अगर अधिकारी प्रोपर चेकिंग करें तो ये मामलो उजागर हो सकता है।

विद्यार्थी परिषद कर चुकी है शिकायत

निजी स्कूल संचालकों के इशारे पर निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें बेचने केे मामले में विद्यार्थी परिषद के छात्र प्रशासन को शिकायत कर चुके हैं। छात्रों ने मांग की है कि निजी प्रकाशकों की पुस्तकें प्रतिबंधित करने के आदेश प्रदान करें ताकि निजी स्कूल संचालक पालकों की जेब पर डांका न डाल सकें।

यहां दुकान की हैं तय

प्राइवेट स्कूल संचालकों ने पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, गल्र्स स्कूल रोड, फाटक बाहर, सदर बाजार सहित अन्य क्षेत्रों में दुकान तय कर ली हैं। इन दुकानों पर प्राइवेट स्कूल संचालकों ने अपनी अपनी पुस्तकों को रखवा दिया है। प्रशासन इन दुकानों पर छापामार कार्रवाई कर संबंधित स्कूल संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई करे तो पालकों को राहत मिल सकती है।

ये बोले पालक

मेरा बच्चा कक्षा दो में पढ़ता है। स्कूल संचालक ने पुरानी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित बुक स्टोर से किताब लेने को कहा। मैं वहां गया तो 2500 रुपए की किताब दी हैं।

मुंशीलाल, पालक

मेरा बच्चा कक्षा पांच में पढ़ता है। स्कूल संचालक के अनुसार गल्र्स स्कूल रोड पर स्थित किताब की दुकान पर गया, वहां 3500 रुपए की किताब दीं गईं।

सुषमा सिंह, पालक

पालकों की शिकायत मिल रही हैं। जल्द ही जिला व विकासखंड स्तर पर समिति बनाकर जांच कराएंगे, अगर मामला सही पाया गया तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

एस के सक्सेना, जिला शिक्षा अधिकारी

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