पर्सनल लॉ करता महिलाओं से भेदभाव कोर्ट ने कहा कि देश में सभी महिलाएं समान हैं, लेकिन धर्म के आधार पर पर्सनल लॉ महिलाओं के बीच अंतर करता है। जब हिंदू कानून के तहत एक बेटी को बेटे के समान सभी मामलों में समान दर्जा और अधिकार दिए जाते हैं, तो मुस्लिम कानून के तहत ऐसा नहीं है। इसलिए अदालत की राय है कि हमारे देश को पर्सनल लॉ के बजाय यूसीसी की आवश्यकता है ताकि संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार)का उद्देश्य हासिल होगा। मुस्लिम कानून के तहत बहन को अवशिष्ट के रूप में हिस्सा पाने का अधिकार है, लेकिन हिस्सेदार के रूप में नहीं।
यह था मामला हाईकोर्ट ने समीउल्ला खान और अन्य की अपीलों पर निर्णय में यह टिप्पणियां और आदेश दिया। अपीलार्थी भाई-बहन ने अपनी बहन शहनाज बेगम द्वारा छोड़ी गई संपत्ति में बंटवारे में प्रतिवादिययों को हिस्सा देने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश में आंशिक संशोधन कर याचिका का निपटारा किया।