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नवाचार, रोजगार और उद्यमिता का संगम

— पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री

जयपुरApr 04, 2025 / 11:43 am

विकास माथुर

प्रयागराज महाकुंभ के बाद अब विकास की तीन धाराओं – नवाचार, रोजगार सृजन और उद्यमिता का संगम तीन से पांच अप्रेल तक स्टार्टअप महाकुंभ के रूप में हो रहा है। इसमें तीन हजार से अधिक स्टार्टअप, एक हजार से अधिक निवेशक, 500 से अधिक वक्ता और दुनियाभर से 15,000 से अधिक प्रतिनिधि और व्यवसायी शामिल हो रहे हैं, जिसमें 50 से अधिक देशों की भागीदारी है।
यहां स्टार्टअप्स को सहयोग, मार्गदर्शन, धन उपलब्ध कराने और नए बाजारों तक पहुंच का पता लगाने के लिए एक शक्तिशाली मंच दिया जा रहा है। समर्पित विशेषज्ञों की कक्षाएं, ज्ञान सत्र और नेटवर्किंग फोरम के साथ यह कार्यक्रम न केवल नवाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि उद्यमियों की अगली पीढ़ी को अपने स्वयं के उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित भी करेगा।  साथ ही, इस वर्ष के महाकुंभ में, तीन-स्तरीय निवेशक-नेतृत्व वाली जूरी प्रक्रिया 50 करोड़ रुपए के पुरस्कार पूल के साथ भारत के सबसे बड़े निजी क्षेत्र की ओर से वित्त पोषित ग्रैंड इनोवेशन चैलेंज में 150 फाइनलिस्ट का चयन करेगी। चाहे शतरंज का खेल हो या प्राचीन भारत में ‘शून्य’ की अवधारणा या आज का यूपीआइ, चंद्रयान और मंगलयान, नवाचार हमेशा से ही भारतीय डीएनए का हिस्सा रहा है। स्वस्थ अनुसंधान और विकास के माध्यम से प्राप्त नए विचार, नवीन वस्तुएं और सेवाएं भारत को 2047 तक विकसित देश बनने के अपने मिशन में आगे बढ़ाएंगी। इस कार्यक्रम का विषय स्टार्टअप इंडिया — 2047 है।
वर्ष 2015 में स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वैश्विक स्टार्टअप हब बनाने और देश को रोजगार सृजन करने वाले देश में बदलने का अपना सपना स्पष्ट किया। इसके तुरंत बाद, परिवर्तनकारी स्टार्टअप इंडिया पहल शुरू की गई। इस पहल ने युवा ऊर्जा का ऐसा जबरदस्त प्रवाह पैदा किया है, जो भारत के उद्यमशीलता परिदृश्य को बदल रहा है। पंजीकृत स्टार्टअप की संख्या 2016 में लगभग 500 थी जो बढ़कर अब लगभग 1.7 लाख हो गई है। ये उद्यम फिनटेक, डीप-टेक, एड-टेक, नैनो-टेक, बायो-टेक, स्पेस-टेक, एग्री-टेक और हेल्थ-टेक सहित 55 से अधिक क्षेत्रों में फैले हुए हैं। सरकार स्टार्टअप्स को धन उपलब्ध कराने में सहायता देने के लिए भी सक्रिय रूप से पहल कर रही है। पिछले साल के बजट में हमारी सरकार ने एंजल टैक्स को समाप्त कर दिया था। इस साल बजट में दस हजार करोड़ रुपए का नया फंड ऑफ फंड्स शुरू किया गया।
सरकार की ओर से पंजीकृत स्टार्टअप ने 31 जनवरी, 2025 तक 17.69 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा की हैं। इसके अलावा, वे वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के लिए अत्याधुनिक समाधान प्रदान कर रहे हैं। हमारे स्टार्टअप बहुत फुर्तीले और तेज-तर्रार हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान जिन स्टार्टअप ने मजबूत विश्लेषणात्मक समाधान, ड्रोन, दूरसंचार प्लेटफॉर्म आदि विकसित किए थे, उन्होंने सम्पर्क ट्रेसिंग, क्वारंटीन निगरानी और वॉर रूम के लिए डैशबोर्ड विकसित करने में इन तकनीकों का लाभ उठाने के लिए तेजी से काम किया। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, एक बिलियन डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाले भारतीय यूनिकॉर्न की संख्या 2016 से पहले 10 से भी कम थी, जो आज बढ़कर 110 से अधिक हो गई है, जिनका सामूहिक मूल्य 385 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक है।  सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) में पात्र स्टार्टअप का विशेष प्रावधान किया गया है।
यह प्लेटफॉर्म विक्रेताओं को सरकारी विभागों के जरिए खरीद के लिए पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त पहुंच प्रदान करता है, जिससे उद्यमियों को जटिल प्रक्रियाओं और निहित स्वार्थों से बचने में मदद मिलती है, जो इसके लॉन्च से पहले संचालित होते थे।  जीईएम ने 29 हजार 780 सरकारी पंजीकृत स्टार्टअप्स को लोकतांत्रिक बाजार पहुंच, आसान उत्पाद सूचीकरण और सार्वजनिक खरीद में टर्नओवर और अनुभव की आवश्यकताओं में छूट की मदद से 37 हजार 460 करोड़ रुपए के चार लाख 9 हजार 155 ऑर्डर पूरा करने में सक्षम बनाया है। फलता-फूलता स्टार्टअप इकोसिस्टम जीवन की सुगमता को बढ़ाने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को बदल रहा है। स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं को उद्यमशीलता की संस्कृति अपनाने में मदद कर रहा है, जो भारत को नवाचार, नई तकनीक और नए विचारों का वैश्विक केंद्र बनाएगा।

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