वहीं, आमजन को सांपों के बारे में सही जानकारी भी दी जा रही है। ऐसे में आमजन में जागरूकता आने लगी है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक भारत में हर साल करीब 58 हजार लोगों की मौत सांप के काटने से होती है। इसके पीछे जागरूकता और सही समय पर इलाज का ना मिलना कारण बताया जाता है।
गौरतलब है कि गत कुछ वर्षों से कस्बों समेत गांवों में भी एनिमल रेस्क्यूअर सांपों के बचाव के लिए कार्य कर रहे हैं। जिससे ग्रामीणों में भी जागरूकता दिखने लगी है। इससे अब कहीं भी सांप दिखाई देने पर संबंधित लोगों को सूचना पर बुलाया जाने लगा है। जिससे सांपों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ा जाने लगा है। गत वर्षों से वाइल्ड लाइफ एंड एनिमल रेस्क्यू सोसायटी लगातार सर्प संरक्षण का कार्य कर रही है।
किसानों का मित्र होता है धामण सांप
धामण सांप या इंडियन रैट स्नेक की लंबाई आमतौर पर तीन मीटर तक होती है। यह सांपों के सबसे बड़े परिवार कोलुब्रीडी का सदस्य हैं। ये भारत में लगभग हर जगह पाए जाते हैं। धामण सांप को किसानों का मित्र भी कहा जाता है, क्योंकि ये बड़ी संख्या में चूहों को खाते हैं और चूहे किसानों को अधिक नुकसान पहुंचाते हैं। यह सांप किसान मित्र है जो पूर्णत: विषहीन है। इसके अंदर किसी प्रकार का कोई जहर नहीं होता है। किसानों के खेतों पर मकान, झोंपडियों और घरों में यह अक्सर चूहे खाने के लिए आ जाता है। लेकिन यह मानव के लिए कतई हानिकारक नहीं है। रेस्क्यूअर लवकुमार जैन ने बताया कि यह सांप जहरीला नहीं बल्कि डरता है। धामण सांप में जहर ही नहीं होता है, ना उसके मुंह में और ना ही उसकी पूंछ में।
80 फीट गहरे कुएं से सुरक्षित निकाला सांप
हाल ही में संस्था की ओर से 80 फीट गहरे कुएं में गिरे धामण सांप को सुरक्षित बाहर निकाला। पर्यावरण प्रेमी इस संस्था के संस्थापक लव कुमार जैन ने बताया कि होली के अगले दिन धुलेंडी पर सूचना मिली थी कि रामनारायण कुमावत के कुएं में बड़ा धामण सांप कई दिनों से है। जिस पर संस्था के सदस्य प्रकाश कुमावत, चेनीराम कुमावत सहित पूरी टीम दलोट तहसील के सामने खेत में कुएं पर पहुंची। जहां 80 फीट गहरे कुएं में सेटी बेल्ट के सहारे सावधानी पूर्वक उतर कर कुएं के अंदर से सांप को सुरक्षित निकाला जिसके बाद उसे वन क्षेत्र में छोड़ दिया।