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राजगढ़

रसूखदार किसानों की कर्जखोरी से सहकारी समितियां हो रही कंगाल ! प्रशासन ने जारी की चेतावनी

cooperative societies: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की सहकारी समितियों में रसूखदार किसानों और व्यापारियों द्वारा लिया गया 20 करोड़ का कर्ज बकाया है। प्रशासन ने अब सख्त तेवर दिखाते हुए डिफॉल्टर किसानों और व्यापारियों पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

राजगढ़Mar 24, 2025 / 03:34 pm

Akash Dewani

20 crores loan by influental farmers pending in the cooperative societies in rajgarh
cooperative societies: राजगढ़ की सहकारी समितियों में प्रभावशाली लोगों द्वारा लिया गया कर्ज बकाया होने के कारण गंभीर वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। 1662 किसानों पर करीब 20 करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है, जिनमें कई राजनीतिक और सहकारी संस्थाओं से जुड़े रसूखदार लोग शामिल हैं। इन प्रभावशाली लोगों ने समितियों से लाखों रुपए का कर्ज लिया, लेकिन इसे चुकाने के बजाय अपनी सामाजिक और राजनीतिक पहुंच का फायदा उठाकर मामले को टालते रहे।

डिफॉल्टरों से सख्ती से होगी वसूली

राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए डिफॉल्टर किसानों से सख्ती से वसूली के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अगर किसान कर्ज नहीं लौटाते, तो उनकी उपज खरीदने वाले व्यापारियों पर भी कार्रवाई होगी। कलेक्टर मिश्रा ने व्यापारियों को चेतावनी दी है कि अगर उन्होंने सहकारी समितियों को किसानों की उपज की जानकारी नहीं दी या पैसा जमा नहीं कराया, तो उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएंगे।

समिति से जुड़ने वाले ही है बकायादार

डिफॉल्टरों की सूची देखने पर यह सामने आया है कि ज्यादातर नाम उन्हीं लोगों के हैं, जो या तो सहकारी समितियों के अधिकारी, कर्मचारी रह चुके हैं या फिर किसी न किसी राजनीतिक पद पर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि समितियों के ही अधिकारी और कर्मचारी बड़े बकायादारों में शामिल हैं।
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प्रशासन के रुख पर सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन की सख्ती के बावजूद इन रसूखदारों से वसूली हो पाएगी? या फिर राजनीतिक और सामाजिक पहुंच के कारण समितियां वसूली करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगी?

किसानों पर बढ़ा दबाव

बड़े बकायादारों के कारण सहकारी समितियों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। समितियों के पास न तो पर्याप्त पैसा बचा है और न ही वे नए किसानों को कर्ज देने की स्थिति में हैं। ऐसे में अगर जल्द ही बकाया राशि की वसूली नहीं हुई, तो समितियों का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

फसल खरीदने पर होगी वसूली

कर्ज वसूली को लेकर हाल ही में एक बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में यह बात सामने आई कि कुछ लोग सरकारी संस्थाओं के माध्यम से अपनी उपज ना भेजते हुए प्राइवेट व्यापारियों को बेच देते हैं। इस वजह से कर्ज की वसूली नहीं हो पा रही है। अब प्रशासन ने व्यापारियों को भी सख्त चेतावनी दी है कि यदि वे बिना जानकारी के डिफॉल्टर किसानों की फसल खरीदते हैं, तो उनसे भी वसूली की जाएगी।

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