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चेट्रीचंड्र पर्व की तैयारियां शुरू, भगवान झूलेलाल की आराधना करेगा सिंधी समाज

सागर. चैत्र शुक्ल द्वितीया से सिंधी नववर्ष का शुरू होता है। इसे चेट्रीचंड्र के नाम से जाना जाता है। इसे इष्टदेव भगवान झूलेलाल के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

सागरMar 21, 2025 / 12:03 pm

रेशु जैन

jhulelal

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वाहन रैली, शोभायात्रा व प्रभात फेरी जैसे आयोजन होंगे

सागर. चैत्र शुक्ल द्वितीया से सिंधी नववर्ष का शुरू होता है। इसे चेट्रीचंड्र के नाम से जाना जाता है। इसे इष्टदेव भगवान झूलेलाल के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। झूलेलाल की जयंती का यह पर्व 30 मार्च रविवार को है। सिंधी समाज संत कंवरराम वार्ड स्थित झूलेलाल मंदिर में इसे धूमधाम से मनाने की तैयारी जारी है।
जय माता दी झूलेलाल शरण मंडली के संस्थापक लालाराम मेठवानी ने बताया की भगवान झूलेलाल का 25 मार्च को अभिषेक सुबह 8.30 बजे झूलेलाल मंदिर में करेंगे। 26 मार्च को मनोकामना पूर्ण बहराणा साहब की शोभायात्रा निकाली जाएगी। 28 मार्च महिला वाहन रैली सुबह 8 बजे रैली निकलेगी। रैली में महिलाएं व युवतियां सफेद ड्रेस और नारंगी चुन्नी और सफेद केप के साथ रहेंगी। 30 मार्च प्रभात फेरी सुबह 5.30 बजे झूलेलाल मन्दिर से पूरे वार्ड का भ्रमण कर झूलेलाल मंदिर पहुंचेगी। महिला वाहन रैली के गिफ्ट दिए जाएंगे। रविवार को झूलेलाल मंदिर में रात्रि 8 बजे महाआरती, पल्लव और केक काटकर उत्सव मनाएंगे। इस मौके पर सिंधी पंचायत अध्यक्ष भीष्म राजपूत, महिला मंडल अध्यक्ष दिया राजपूत, लीला आहूजा, कविता लहरवानी, रैना बॉस गोकलानी, मानसी दरयानी, दीपांशु नागदेव, मोनिका मेठवानी, काजल रोहड़ा, वर्षा हासनी, कनक लोटवानी, मण्डली अध्यक्ष सुरेश मोहनानी, विजय लालवानी, वीनू आहूजा सोनू जेसवानी, अजय पंजवानी आदि सहयोग करेंगे ।
24 घंटे जल रही है अखंड ज्योति
सिंधु संस्कार समिति के संस्थापक राजेश मनवानी ने बताया कि झूलेलाल मंदिर पर प्रज्वलित अखंड ज्योति भारत विभाजन के बाद सिंधी समाज वरिष्ठजनो बुजुर्गो द्वारा सिंध पाकिस्तान स्थित ज्योति से प्रज्वलित कर लाई गई थी। जो अभी तक उसी अवस्था में प्रज्ज्वलित है। अखण्ड ज्योति का शुद्ध घी व सरसों के तेल व बाती का विशेष रूप से ध्यान मंदिर के कार्यकर्ताओं को रखना पड़ता है, जिससे ज्योति कभी बुझ नहीं पाए। भगवान झूलेलाल की पूजा जल व ज्योति के रूप में किए जाने का महत्व है। मान्यता है कि ज्योति के समक्ष झोली फैलाकर पल्लव पाकर श्रद्धा भाव से जो भी मन्नत की जाती वह अवश्य पूरी होती है। अत: सिंधी समाज शुभ भावना से भगवान झूलेलाल की जल व ज्योति के रूप में पूजा करता है।

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