पुराने पहियाें से रोडवेज की रफ्तार धीमी
टायर की आपूर्ति में कमी, टायर को रिपेयर कर चला रहे बसें
अनूपगढ़ जा रही बस का टायर फटने से घायल हो गए थे तीन यात्री
—पत्रिका अभियान: कंडम बसों में बेबस यात्री अभियान


- श्रीगंगानगर.गर्मी का मौसम आ चुका है। तपती सड़कों पर पुराने टायरों के बल पर दौड़ रही रोडवेज बसों में यात्रा कर रहे लोगों की जान सांसत में है। एक के बाद एक टायर फटने की घटनाओं ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है, लेकिन बसों में सफर करना मजबूरी है। तीन दिन पहले श्रीगंगानगर से भौडक़ी (हरियाणा) जा रही बस का टायर फट गया। इसके बाद टायर को झुंझुनूं डिपो से बदलवाया गया। सूरतगढ़ मार्ग की एक बस में भी टायर में तकनीकी दिक्कत आई थी। एक दिन पहले श्रीगंगानगर से अनूपगढ़ जा रही एक रोडवेज बस का टायर फटने से चार लोग घायल हो गए, जिसमें एक बुजुर्ग महिला का पैर लोहे के टुकड़े से चोटिल होने के कारण फ्रेक्चर हो गया।
- गौरतलब है कि श्रीगंगानगर आगार डिपो में संचालित 91 बसों में से 57 निगम की और 34 अनुबंधित हैं। टायरों की कमी के कारण बसों को पुराने और रिसाइकिल किए गए टायरों पर चलाने को मजबूर किया जा रहा है। जयपुर मुख्यालय से टायरों की आपूर्ति कम हो रही है। श्रीगंगानगर आगार डिपो में मार्च में नए टायरों की आपूर्ति नहीं हुई।
टायरों की समस्या, निगम की बढ़ती चिंता
- कई बसें कंडम हो चुकी हैं और पुरानी टायरों का उपयोग यात्रियों के लिए असुविधा पैदा कर रहा है। गर्मी में पंक्चर की समस्या बढऩे से यात्रियों और निगम दोनों के लिए परेशानी खड़ी कर रहा हैं। यह सुरक्षा के साथ-साथ निगम के राजस्व को भी नुकसान पहुंचा रही है।
यात्री असुविधा का सामना कर रहे हैं
- निगम के अधिकारी स्थिति को गंभीर बताकर अलर्ट कर रहे हैं। अनूपगढ़ आगार प्रबंधक राजीव कुमार ने बताया कि गर्मी में टायर के स्टील वायर का कमजोर होना टायरों के फटने का एक मुख्य कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए नई टायरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश रहती है।
बसों में पुराने टायरों से रहती हादसे की आशंका
- पुराने टायरों की संरचना कमजोर होती है। रबड़ चढ़ाने से उनकी मजबूती और स्थिरता प्रभावित होती है, जिससे टायर फटने का खतरा बढ़ जाता है। नए रबड़ के चढऩे से पुराने टायर की पकड़ और ग्रिप कम हो जाती है। विशेषकर बारिश या गीली सडक़ पर, बसों का नियंत्रण खोने का जोखिम बढ़ जाता है। रबड़ चढ़ाने के बाद भी टायर जल्दी घिस जाते हैं और नए टायर की आवश्यकता पड़ सकती है।
नई बसें आने पर यह समस्या समाप्त हो जाएगी
- नए टायर निर्धारित किलोमीटर चलने के बाद ही बसों में लगाए जाते है। कुछ बसों में टायर पर रबड़ चढ़ाकर भी चलाए जाते हैं। कहीं पर जरूरत होती है तो टायर बदल कर नए भी लगाए जाते हैं। आगार डिपो में नई बसें आने पर यह समस्या समाप्त हो जाएगी।
- नरेंद्र चौधरी, मुख्य प्रबंधक, श्रीगंगानगर आगार
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