विधायक इंदिरा मीणा ने सोशल मीडिया पर दो पत्रों को पोस्ट किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार निराश्रित गायों और किसानो के प्रति असंवेदनशील है। मेरी ओर से ब्लॉक बामनवास मे सरकार से गोशाला चाही गई। लेकिन जबाव दुर्भाग्य पूर्ण मिला। जब सरकार व विभाग ही गोशाला नही खोल सकती तो ऐसे मे सरकार की ओर से गाय का नाम परिवर्तन करना और विशेष चर्चा कराने का क्या औचित्य है।
मंत्री ने निदेशक को पत्र पर उचित कार्रवाई के लिए लिखा…
विधायक इंदिरा मीणा ने 12 मार्च को गोपालन मंत्री जोराराम कुमावत को पत्र लिखकर गोशाला खोलने की मांग की थी। इंदिरा मीणा ने पत्र में लिखा था कि बामनवास में किसानों को निराश्रित गायों की वजह से फसल का नुकसान होता है। इस क्षेत्र में गायों की संख्या अत्यधिक होने से गायों की दुर्दशा भी हो रही है। इसलिए ब्लॉक बामनवास में गोशाला खोली जाएं। इसके बाद 19 मार्च को मंत्री जोराराम कुमावत में विभाग के निदेशक को इस संबंध में उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
निदेशक ने दिया जवाब, सरकार स्तर पर नहीं होता निर्माण.. निदेशक प्रहलाद सहाय नागा ने पत्र का जवाब देते हुए लिखा है कि गोशालाओं व नंदी सालाओं का निर्माण एवं संचालन जन सहयोग से धार्मिक ट्रस्ट व स्वयं सेवी संस्थाओं की ओर से किया जाता है। राजकीय एवं विभाग स्तर पर गोशाला का निर्माण नहीं किया जाता है ।
विभाग की ओर से निराश्रित गोवंश की समस्या के समाधान के लिए पंचायत समिति नंदी शाला योजना अंतर्गत निर्माण के लिए एक करोड़ 57 लाख व ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम पंचायत गोशाला व पशु आश्रय स्थल योजना अंतर्गत निर्माण के लिए एक करोड़ दिए जाने का प्रावधान है। संबंधित जिला संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग की ओर से नियमानुसार जारी टेंडर प्रक्रिया में भाग लिया जाना प्राविधित है। इन योजनाओं की स्वीकृतियां जिला गोपालन समिति के अनुमोदन पर ही ली जा सकती है।