पाकिस्तान के नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री और समाजसेवी मुहम्मद युनूस ने हाल ही में चीन में एक विवादित बयान दिया था, जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों को और बढ़ा दिया था। हालांकि, अब जब उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की है, तो युनूस ने भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों की संभावना को लेकर सकारात्मक बयान दिया है।
चीन में विवादित बयान का मतलब
मुहम्मद युनूस ने चीन में अपने दौरे के दौरान “सेवन सिस्टर्स” (उत्तर-पूर्वी भारत के राज्य) के बारे में एक विवादित बयान दिया था। युनूस ने चीन में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के राज्यों में चीन का अधिक प्रभाव होना चाहिए और ये राज्य भारत की मुख्यधारा से दूर हैं। यह बयान भारत के लिए संवेदनशील मुद्दा था क्योंकि भारत के लिए उत्तर-पूर्वी राज्यों की स्थिति राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है। इस बयान को भारत में कई लोगों ने गलत और असंवेदनशील बताया, क्योंकि ये बयान भारत की संप्रभुता और अखंडता के खिलाफ प्रतीत हुआ।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव
मुहम्मद युनूस का यह बयान पाकिस्तान और भारत के रिश्तों को और तनावपूर्ण बनाने का कारण बन गया। भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही कश्मीर और आतंकवाद को लेकर विवाद चल रहा है। ऐसे में युनूस का चीन में दिया गया यह बयान दोनों देशों के रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव डालने का कारण बना। भारतीय नेताओं ने इस बयान की कड़ी आलोचना की और इसे पाकिस्तान के आधिकारिक रुख के अनुरूप बताया।
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात
हालांकि, युनूस ने भारत के प्रति अपनी स्थिति को कुछ हद तक बदलते हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच रिश्तों को सुधारने की बात की। युनूस ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच शांति और सहयोग से दोनों देशों को फायदा हो सकता है और इससे पूरे दक्षिण एशिया में स्थिरता आएगी। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच वार्ता और समझौतों की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत-पाकिस्तान रिश्तों में सुधार की संभावना
युनूस ने यह भी कहा कि क्षेत्रीय विकास और आर्थिक समृद्धि के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच सहयोग जरूरी है। उनका मानना है कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को पार करके एक दूसरे के साथ काम करना चाहिए, ताकि दक्षिण एशिया में गरीबी और बेरोजगारी जैसी समस्याओं का समाधान किया जा सके। युनूस का यह बयान भारत में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद और सहयोग की संभावना को देखा जा रहा है।
शांति और सहयोग के लिए एक रास्ता हो सकता है
बहरहाल मुहम्मद युनूस का चीन में विवादित बयान और बाद में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद भारत से रिश्तों को सुधारने की बात करना एक दिलचस्प मोड़ है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच निरंतर संघर्ष और असहमति के बावजूद, शांति और सहयोग के लिए एक रास्ता हो सकता है। हालांकि, पाकिस्तान और भारत के रिश्ते जटिल हैं और इसमें कई कारक शामिल हैं, लेकिन युनूस का यह बयान इस बात को उजागर करता है कि दोनों देशों को एक-दूसरे से संवाद और सहयोग बढ़ाने के अवसरों को तलाशना चाहिए, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और विकास को बढ़ावा मिल सके।