दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का एक मौका
मोदी का श्रीलंका दौरा भारत और श्रीलंका के रिश्तों के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह दौरा न केवल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का एक मौका है, बल्कि इसके माध्यम से कई क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। भारत और श्रीलंका में सामरिक, रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। यह देश समुद्र के मार्ग पर स्थित है जो भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। श्रीलंका की अर्थव्यवस्था भी भारत से बहुत जुड़ी हुई है।
भारतीय और श्रीलंकाई समुद्री सुरक्षा सहयोग पर बल
भारतीय और श्रीलंकाई समुद्री सुरक्षा सहयोग पर बल दिया जा सकता है, खासकर आतंकवाद और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक दूसरे को सहयोग कर सकते हैं। भारतीय और श्रीलंकाई सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए कई पहल की जा सकती हैं।
भारत-श्रीलंका आर्थिक सहयोग के आयाम
भारत और श्रीलंका के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग का संबंध मजबूत है। भारत, श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है और दोनों देशों के बीच कई आर्थिक समझौतों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। भारतीय कंपनियां श्रीलंका में निवेश कर रही हैं और ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, पर्यटन, और कृषि क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे हैं। भारत ने कई बार श्रीलंका को आर्थिक सहायता प्रदान की है। श्रीलंका में भारतीय कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देना भी एक उद्देश्य हो सकता है।
भारत-श्रीलंका सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध
भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते हैं। दोनों देशों की संस्कृति, धर्म, और भाषा में समानताएं हैं, विशेष रूप से बौद्ध धर्म की साझा धरोहर। श्रीलंका में भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक धारा का गहरा प्रभाव है।
भारत-श्रीलंका सुरक्षा सहयोग
भारत और श्रीलंका के बीच सुरक्षा संबंध भी महत्वपूर्ण हैं, खासकर समुद्री सुरक्षा के संदर्भ में। भारत और श्रीलंका के पास इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है।
भारत-श्रीलंका के बीच तमिल मुद्दा
श्रीलंका में तमिलों के अधिकारों को लेकर मुद्दे भी रहे हैं, और भारत का इसमें एक अहम रोल है। भारत, श्रीलंकाई तमिलों के अधिकारों के समर्थन में रहता है, खासकर युद्ध के बाद के पुनर्निर्माण और शांति प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाता है।
व्यापार, अर्थव्यवस्था और विकास के मुद्दे पर बात हो सकती है
यह कोलंबो के सिनामन गार्डन स्थित स्वतंत्रता स्क्वायर में स्थित है और इसमें स्वतंत्रता स्मारक संग्रहालय भी शामिल है। श्रीलंका में इंडियन पीस कीपिंग फोर्स मेमोरियल की 32 महीने की तैनाती के दौरान 1,165 भारतीय सैनिकों ने अपने प्राण न्योछावर किए थे। इसके अलावा, इस संघर्ष में 5,000 से अधिक श्रीलंकाई नागरिकों की भी मृत्यु हुई थी। श्रीलंका में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को लेकर स्थानीय लोग बहुत उत्साहित हैं। कोलंबो के निवासी रोहित रंजीत ने कहा कि यह भारत और श्रीलंका के बीच एक अच्छा कूटनीतिक कार्यक्रम है।
पीएम मोदी के स्वागत के लिए श्रीलंका में खास तैयारियां
प्रधानमंत्री मोदी शुक्रवार रात आठ बजे कोलंबो पहुंचेंगे और वह कोलंबो के ताज समुद्र होटल में रुकेंगे, जहां उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इस होटल को विशेष रूप से सजाया गया है और प्रधानमंत्री की गर्मजोशी से मेहमान नवाजी की जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। मोदी 5 अप्रैल को श्रीलंका के ऐतिहासिक स्वतंत्रता स्मारक हॉल का दौरा करेंगे। यह स्मारक श्रीलंका को 4 फरवरी 1948 को ब्रिटिश शासन से मिली आजादी की याद में बनाया गया था।
मोदी का श्रीलंका दौरा दोनों देशों के लिए बहुत अहम
बहरहाल प्रधानमंत्री मोदी का श्रीलंका दौरा दोनों देशों के रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरे में, मोदी श्रीलंका के नेताओं से मिलकर द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा करेंगे और दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देंगे। प्रधानमंत्री मोदी का श्रीलंका दौरा दोनों देशों के लिए बहुत अहम है, क्योंकि यह आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा दृष्टिकोण से दोनों देशों के रिश्तों को और प्रगाढ़ करेगा। भारत और श्रीलंका के रिश्ते हमेशा से मजबूत रहे हैं, लेकिन यह दौरा उन्हें और अधिक सशक्त बना सकता है, खासकर जब क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर दोनों देशों को सामूहिक रूप से काम करने की आवश्यकता है।