मैच के बाद ऋतुराज गायकवाड़ ने कहा, “ईमानदारी से कहूँ तो, मुझे अभी भी लगता है कि इस विकेट पर 170 रन का स्कोर चेस लायक था। बल्लेबाजी के लिए यह उतना अच्छा नहीं था। फील्डिंग में खराब दिन की वजह से हमें बहुत नुकसान हुआ। कुल मिलाकर जब आप 170 रन का पीछा कर रहे होते हैं, तो आप अलग तरह से बल्लेबाजी करते हैं। जब आप बल्लेबाजी करने जाते हैं तो आपके पास थोड़ा समय होता है। जब आप ऐसे विकेट पर 20 रन अतिरिक्त का पीछा कर रहे होते हैं और गेंद पुरानी होने के बाद रुक कर आएगी, तो आपको पावरप्ले में थोड़ा अलग तरीके से बल्लेबाजी करनी होती है। दूसरी पारी में पिच धीमी हो गई।”
फील्डर्स पर फोड़ा हार का ठीकरा
अपने बल्लेबाजों के बचाव में गायकवाड़ ने कहा, “राहुल ने अपने शॉट खेले, मैंने जाकर अपने शॉट खेले, कभी-कभी यह काम करता है, कभी-कभी नहीं। ऐसे समय होते हैं जब आपके दिमाग में बराबर स्कोर होता है और शायद जब आप 20 रन अतिरिक्त का पीछा कर रहे होते हैं, तो आप हमेशा खेल से एक कदम आगे रहना चाहते हैं। यही सोच थी, वास्तव में काम नहीं किया। फिर भी खुश हूं कि हम बड़े अंतर से नहीं हारे और अंतर सिर्फ 50 रन था। जब आपकी टीम में तीन विश्व स्तरीय स्पिनर होते हैं, तब आप चाहते हैं कि नए बल्लेबाज उनका सामना करें। यहीं से खेल काफी बदल जाता है। वे बस चलते रहे, हमने महत्वपूर्ण समय पर कैच छोड़े और फिर उसके बाद हमेशा एक अतिरिक्त छक्का या अतिरिक्त बाउंड्री आती रही। रनगति जारी रही और अंतिम ओवर तक नहीं रुकी।” गायकवाड़ ने अपनी फील्डिंग में सुधार पर जोर देते हुए कहा, “आईपीएल जैसे टूर्नामेंट में बल्लेबाजी और गेंदबाजी में हमारा खराब हो सकता है, लेकिन मुझे लगता है कि फील्डिंग में काफी सुधार करना होगा और हमें फील्डिंग विभाग में मजबूत वापसी करनी चाहिए। रचिन बिल्कुल लय में नहीं थे, लेकिन उन्होंने एक छोर संभाले रखा। हुड्डा और दुबे ने कुछ समय तक गेम को बनाए रखा लेकिन लेकिन दयाल की डबल-स्ट्राइक ने मैच को लगभग खत्म कर दिया। अश्विन ने कोशिश की, जडेजा ने कुछ हिट लगाए, धोनी ने देर से हिट लगाए, लेकिन कुल मिलाकर हम मैच पहले ही हार चुके थे।”