जनजाति विकास कोष की बढ़ाई राशि
खराड़ी ने कहा कि वर्तमान बजट में भी जनजाति विकास को लेकर बड़ी घोषणाएं की गई हैं। जनजातीय उपयोजना क्षेत्र में आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से जनजाति विकास कोष की राशि 1500 करोड़ रूपए से बढ़ाकर 1750 करोड़ रुपए किए जाने की घोषणा हुई है। उन्होंने सदस्यों और जनजाति क्षेत्र निवासियों को आश्वस्त किया कि बजट घोषणाओं को समयबद्ध पूर्ण करा लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जनजाति आस्था के केन्द्रों का समग्र विकास हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए बारां स्थित सीताबाड़ी और उदयपुर स्थित कमलनाथ महादेव व जावरमाता में कार्यों के लिए 16 करोड़ रूपए से अधिक की स्वीकृतियां जारी कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि जनजाति युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना भी हमारी जिम्मेदारी है। अभी 4 हजार 697 युवाओं को प्रशिक्षण मिल चुका है।
वनधन केन्द्रों से लाभान्वित हो रहा जनजाति वर्ग
केन्द्र सरकार द्वारा जनजाति वर्ग के कृषि एवं वन आदि उत्पादों के विपणन में सहयोग प्रदान करने के लिए वनधन केंद्रों की स्थापना हुई हैं। राज्य के 9 जिलों में 530 वनधन केंद्रों से लगभग 1 लाख 53 हजार सदस्य लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिम जाति सहरिया के विकास पर भी सरकार विशेष ध्यान दे रही है।
केंद्र सरकार की पीएम जनमन योजना के तहत बारां जिले के सहरिया क्षेत्र में नवीन 17 मल्टी-परपज केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। जिले में ट्राईफेड, जनजाति कार्य मंत्रालय केंद्र सरकार द्वारा 51 वनधन विकास केंद्रों का गठन किया गया है। इसके अतिरिक्त अति-पिछड़ी सहरिया, कथौड़ी जनजाति एवं खैरवा जाति के लगभग 1 लाख 30 हजार से अधिक व्यक्तियों को प्रतिमाह प्रति यूनिट 500 ग्राम दाल, 500 मिलीग्राम तेल व 250 मिलीग्राम देशी घी नि:शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।