CG News: खत्म हो रहा कोयले का भंडार
इस खदान में धीरे-धीरे कोयले का भंडार खत्म हो रहा है। केंद्र सरकार से मिली अनुमति के अनुसार यहां से कोयला कंपनी सालाना 5.2 मिलियन टन (52 लाख टन) कोयला बाहर निकाल रही है। यदि इसी आधार पर इस खदान से कोयला खनन होता रहा तो आने वाले 8-9 वर्षों में यहां कोयले का भंडार खत्म हो जाएगा। इसकी जानकारी एसईसीएल की ओर से हाल ही में कोयला मंत्रालय को दी गई है। इस रिपोर्ट में कोरबा जिले में स्थित अन्य कोयला खदानों की स्थिति के संबंध में भी बताया गया है। गौरतलब है कि मानिकपुर कोयला खदान का विस्तार भी कंपनी करने जा रही है। कंपनी की योजना इसके लिए ग्राम भिलाईखुर्द गांव को यहां से हटाने की है। वर्तमान में जिस स्थान पर खनन चल रहा है उसके करीब यह गांव स्थित है। कंपनी की ओर से कोशिश की जा रही है कि समय रहते ग्रामीणों को समझा-बुझाकर यहां से विस्थापित किया जाए ताकि लक्ष्य के अनुसार कोयला खनन को पूरा किया जा सके।
सीएमपीडीआई खदान के आसपास कर रहा सर्वे
मानिकपुर में मौजूद 46.12 मिलियन टन कोयले का भंडार पूर्व में किए गए सर्वे पर आधारित है। यह सर्वे कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी सीएमपीडीआईएल ने किया है। इस खदान के आसपास और कितना भंडार मौजूद है इस संबंध में सीएमपीडीआई जानकारी जुटा रही है। आसपास लगे गांव गोढ़ी सहित अन्य गांवों में सीएमपीडीआई की मशीनें सर्वे कर रही है। उरगा बायपास रोड पर भी यह सर्वे का काम चल रहा है। गांव दादर से सटे ढेलवाडीह में सीएमपीडीआई ने सर्वे किया है। लेकिन अभी तक इन क्षेत्रों में कोयले का कितना भंडार मिला है इसकी पुष्टि नहीं हुई है। अगर इस क्षेत्र में कोयले का और भंडार मिलता है तो इससे खदान को और आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
6 मिलियन टन खनन की अनुमति का इंतजार
आने वाले दिनों में मानिकपुर खदान से भी कोयला खनन बढ़ाने की कार्ययोजना बनाई गई है। इस खदान से सालाना उत्पादन 5.25 मिलियन टन से बढ़ाकर 6 मिलियन टन किया जाना है। इससे संबंधित फाइल को एसईसीएल के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ने मंजूरी दे दी है और यह फाइल कोल इंडिया मुयालय के जरिए कोयला मंत्रालय तक भेजी गई है। जैसे ही केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति मिलेगी यहां से कोयला खनन भी बढ़ाया जाएगा। विस्तार की योजना आगे बढ़ती है तो मौजूदा भंडार को बाहर निकालने में कंपनी को 7 से 8 वर्ष का ही समय लगेगा। गौरतलब है कि मानिकपुर कोयला खदान आउटसोर्सिंग पर चल रहा है। गिनती के नियमित कर्मचारी यहां कार्यरत हैं।