सवाल : आपने बराक ओबामा के साथ काम किया है, उनकी नेतृत्व शैली को आप कैसे देखती हैं? जवाब: बराक ओबामा की नेतृत्व शैली बेहद समावेशी और विचारशील थी। वो हमेशा विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने और एक संतुलित निर्णय लेने के लिए तैयार रहते थे। उनकी शांति और धैर्य से काम करने की क्षमता ने उन्हें एक प्रभावशाली नेता बनाया।
सवाल : भारत-अमेरिका रिश्तों को और मजबूत करने के लिए किस प्रकार के कदम उठाए जाने चाहिए? जवाब: भारत और अमेरिका के बीच पहले ही बहुत मजबूत रिश्ते हैं, लेकिन दोनों देशों के लिए कुछ अहम क्षेत्र जैसे व्यापार, रक्षा सहयोग और प्रौद्योगिकी में और विस्तार की जरूरत है। भारत में निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ अमेरिका को भारत के विकास में सक्रिय भागीदार बनना चाहिए।
सवाल: वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में अमेरिका और भारत के बीच रक्षा सहयोग का क्या महत्व है? जवाब: अमेरिका और भारत के बीच रक्षा सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में यह अहम है। दोनों देशों के बीच सैन्य साझेदारी रणनीतिक गठबंधन को मजबूत करती है, जिससे न केवल सुरक्षा, बल्कि दोनों देशों के सामरिक हित भी सशक्त होते हैं।
सवाल: आपकी नजर में, आजकल तकनीकी नवाचार के संदर्भ में दोनों देशों के बीच सबसे अहम क्षेत्र कौन सा है? जवाब: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग से वैश्विक चुनौतियां हैं। इन क्षेत्रों में निवेश और साझेदारी से आर्थिक विकास और नए अवसरों की दिशा तय की जा सकती है।
सवाल : आपने ओबामा प्रशासन में काम किया है, उस समय का सबसे चुनौतीपूर्ण निर्णय क्या था और आपने उसे कैसे हल किया? जवाब: ओबामा प्रशासन के दौरान, विभिन्न वैश्विक संकटों का समाधान करना एक बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य था। खासकर वित्तीय संकट और मध्य पूर्व में तनावपूर्ण स्थिति से निपटना। हमने उन स्थितियों में साझा जानकारी और सशक्त बहुपक्षीय वार्ता के जरिए कई जटिल निर्णय लिए।
सवाल: प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 की अमेरिका यात्रा से भारत-अमेरिका रिश्तों में क्या बदलाव आ सकते हैं? जवाब: यह यात्रा दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति ला सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से व्यापार असंतुलन को संतुलित करने की दिशा में भी चर्चा होने की उम्मीद है, खासकर जब भारत ने 2023-24 में $32 बिलियन का व्यापार अधिशेष बनाए रखा है। अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार और सहयोग को और बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे।
सवाल : अमेरिका की तरफ से जो सुरक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाने का प्रस्ताव है, उसे लेकर भारत और अमेरिका के बीच क्या रणनीति बन सकती है ? जवाब: यह प्रस्ताव भारत की सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने और दोनों देशों के बीच रणनीतिक गठबंधन को मजबूत करने के उद्देश्य से है। भारत, अमेरिका से रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाने के साथ-साथ, अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करेगा। यह दोनों देशों के लिए आपसी सहयोग का एक अहम पहलू होगा, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और सामरिक स्थिति को भी सशक्त करेगा।
सवाल : क्या इमिग्रेशन मुद्दे पर भी चर्चा होने की उम्मीद है, खासकर कुशल श्रमिकों के कानूनी प्रवासन के बारे में। इसके बारे में आपके क्या विचार हैं ? जवाब: दरअसल कुशल श्रमिकों के कानूनी प्रवासन का मुद्दा महत्वपूर्ण है। अमेरिका में भारतीय पेशेवरों की बड़ी संख्या है, जो तकनीकी और अन्य क्षेत्रों में अहम योगदान दे रहे हैं। इस मुद्दे पर बातचीत का केंद्र बिंदु भारत के कुशल कार्यबल के लिए अधिक अवसर पैदा करने का हो सकता है। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा और भारत के विकास में मदद मिलेगी।
सवाल: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और सामरिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं? जवाब: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंधों को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों को रणनीतिक गठबंधनों पर ध्यान देना होगा। क्वाड जैसे समूहों के जरिए सहयोग को और बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा, ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित हो सके। साथ ही, संयुक्त सैन्य अभ्यास और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा दिया जा सकता है।
सवाल: प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सम्मेलन में भी भाग लिया था। क्या इस प्रकार के तकनीकी सहयोग के लिए कोई खास पहल हो सकती है? जवाब: हां, प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण सहयोग हो सकता है। विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा और उभरती तकनीकों में भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे दोनों देशों को वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए नए अवसर मिलेंगे और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
सवाल: प्रधानमंत्री मोदी की पिछली अमेरिका यात्रा और क्वाड शिखर सम्मेलन के संदर्भ में इस बार की यात्रा में क्या नया होगा ? जवाब: प्रधानमंत्री मोदी की पिछली यात्रा में भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई थी, खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और प्रगति के संदर्भ में अहम थी। इस बार की यात्रा में वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और इमिग्रेशन जैसे प्रमुख मुद्दों पर और गहरी चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने के लिए एक ठोस रास्ता तैयार किया जा सकता है।
सवाल : आप यह कैसे देखती हैं कि मोदी की फरवरी 2025 की अमेरिका यात्रा से दोनों देशों के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा ? जवाब: प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा से भारत और अमेरिका के बीच बहुआयामी सहयोग और रिश्तों को मजबूत करने का अवसर मिलेगा। यह यात्रा व्यापार, रक्षा, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति लाएगी, और भविष्य में बेहतर सहयोग और आपसी विकास की दिशा में एक नई शुरुआत हो सकती है।