सूत्रों के अनुसार करीब सात साल पहले राठौड़ी कुआं निवासी रघुवीर सांखला की दिनदहाड़े हत्या हुई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी दिनेश माली और उसके छोटे भाई को गिरफ्तार किया था। रघुवीर की हत्या का बदला लेने के लिए संदीप उर्फ शेट्टी को सुपारी दी गई। इसी साजिश के तहत 28 नवम्बर 2019 को कार में जा रहे दिनेश व उसके चचेरे भाई नरेंद्र सांखला पर संदीप उर्फ शेट्टी के गुर्गो ने ट्रक चढ़ा दिया था। इससे नरेंद्र सांखला की मौत हो गई थी। इस मामले में करीब आधा दर्जन आरोपी गिरफ्तार हुए थे। आरोपी रोहिताश उर्फ काला तभी से फरार था। पुलिस ने उसे पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया था। रोहिताश ने ही भाड़े के गुर्गों को ट्रक उपलब्ध कराया था। रोहिताश पर करीब आधा दर्जन आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, नशे की तस्करी आदि शामिल है। इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें रघुवीर सांखला की पत्नी सरोज समेत छह आरोपी जमानत पर हैं। एक आरोपी कृष्ण उर्फ गोपाल ही जेल में है।
रिमाण्ड के बाद रोहिताश को नागौर जेल भेजा गया। हार्डकोर क्रिमनल होने के कारण जेल उपाधीक्षक पृथ्वी सिंह कविया ने उदयपुर डीआईजी कैलाश त्रिवेदी को पत्र लिखा है। इसमें बताया कि हार्डकोर क्रिमनल होने के कारण रोहिताश का इस जेल में रखना संभव नहीं है। ऐसे में उसे अन्यत्र जेल में स्थानांतरित किया जाए।
यह है मामला सूत्रों के अनुसार करीब सात साल पहले शहर के राठौड़ी कुआं के रघुवीर सांखला की दिनदहाड़े चाकू घोंप कर हत्या की गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी दिनेश माली व उसके भाई को बाद में गिरफ्तार किया था। इस हत्या का बदला लेने के लिए संदीप उर्फ शेट्टी को सुपारी दी गई। इसमें दिनेश माली व उसके चचेरे भाई नरेंद्र सांखला पर ट्रक चढ़ाया गया था।——————————————————————————————–
जेल डीजी को भेजा शिकायती पत्र, औचक निरीक्षण की मांग नागौर. करीब डेढ़ माह नागौर जेल में रहे लोहारपुरा निवासी सिराजुद्दीन व उसके साथी रमेश खोजा ने जेल डीजी, मानवाधिकार आयोग समेत अन्य कई मंत्री/विधायकों को शिकायती पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि कुछ जेलकर्मियों की मिलीभगत से खास बंदियों को विशेष सुविधा दी जा रही है। आपत्तिजनक व नशे से जुड़ी सामग्री सप्लाई करने का भी आरोप है। इन्होंने जेल का औचक निरीक्षण कराकर दोषी कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
दुर्व्यवहार किया था, अलग सेल में रखा इस संबंध में जेलर स्वरूप सिंह का कहना है कि सिराजुद्दीन 19 दिसम्बर से 31 जनवरी तक जेल में रहा। बीस जनवरी को खाना बांटने के दौरान वो उनसे व मुख्य प्रहरी से उलझ पड़ा। खुद को पार्षद बताते हुए बाहर जाकर देखने की धमकी दी। उसके व्यवहार को देखते हुए उसे कई दिन तक अलग सेल में रखा गया। बाद में उसने माफी भी मांगी। जेल का समय-समय पर निरीक्षण होता है, कैमरे लगे हैं। इन शिकायतों का कोई आधार नहीं है।