एथेनॉल प्लांट, मिलेट व फूड पार्क के लिए एमओयू करने वाले उद्यमी महादेव गुर्जर ने बताया कि जयपुर में बुधवार को बैठक हुइ्र है। इसमें उनके अलावा तीन अन्य उद्यमियों ने भी हिस्सा लिया। गुर्जर ने बताया कि एथेनॉल प्लांट के लिए जमीन के साथ पानी की भी आवश्यकता होगी। भीलवाड़ा अभी डार्क जोन में है। इसके कारण दो प्लांट पहले ही बूंदी में लगने जा रहे है। पानी की अनुमति नहीं मिलने के कारण प्रोसेस हाउस को भी परेशानी आ रही है। डेनिम प्लांट तक नहीं लग पा रहे। भीलवाड़ा में जमीन व पानी नहीं मिलता है तो यह प्लांट भी नीमच में जा सकता है। हालांकि अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि अगली बैठक में जमीन के बारे में भी चर्चा की जाएगी।
फूड पार्क को लेकर चर्चा बैठक में फूड पार्क को लेकर भी चर्चा की गई। गुर्जर ने कहा कि वह फूड पार्क व मिलेट प्लांट एक साथ लगाने को तैयार है। इसके लिए पहले से मांडल के सिडियास में 100 बीघा जमीन पड़ी है। उसमें से जमीन का आवंटन हो। अधिकारियों का कहना था कि फूड पार्क में जमीन मिले इसके लिए उच्च अधिकारियों से चर्चा करके जल्द जमीन दिलाई जाएगी। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार की कोई नीति नहीं होने से यह जमीन लगभग ढाई साल से बेकार पड़ी है। सिडियास में मिनी फूड पार्क में कृषि जिंसों के उत्पादन क्षेत्र के समीप खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज, इन्क्यूबेशन सेंटर, वेयरहाउस, कॉमन प्लेट फॉर्म आदि की स्थापना की जानी थी। मिनी फूड पार्क की स्थापना से स्थानीय कृषि उपजों के प्रसंस्करण, व्यवसाय, निर्यात और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन मिलना था। किसान को फसल की लागत भी मिल पाती, लेकिन केंद्र की तर्ज पर राज्य सरकार ने पार्क के लिए कोई योजना ही नहीं बनाई। गौरतलब है कि राइजिंग राजस्थान के तहत भीलवाड़ा में हुई इंवेस्टमेंट समिट में एग्रो फूड व एथेनॉल प्लांट के लिए एमओयू हुए थे। भीलवाड़ा के उद्यमियों ने तीन अलग-अलग प्लांट लगाने के लिए 275 करोड़ के एमओयू किया था। लेकिन जमीन नहीं मिलने से यह एमओयू धरातल पर नहीं उतर पा रहे है।